डिफेंस कॉरिडोर में सबसे पहले इसी यूनिट में उत्पादन शुरू हुआ है। अप्रैल से उत्पाद करने वाली इस यूनिट की प्रति माह की उत्पाद क्षमता पांच सौ हथियार की है। वहीं अब तक यहां के बने एक हजार हथियार बाजार में पहुंच गए हैं। पांच हजार करीब ऑर्डर भी हैं, जिन पर तेजी से काम चल रहा है। बहुत जल्द यहां के हथियार सेना व कई राज्यों की पुलिस के पास भी दिखेंगे।
हमारी कंपनी पिछले चार दशक से शस्त्र निर्माण के क्षेत्र में काम कर रही है। अभी तक हम यहां से भारतीय बाजार में हथियार बेच रहे थे। मगर अब विदेशी निर्यात व कारतूस निर्माण की मंजूरी मिल गई है। हमारे हथियार अमेरिका ट्रायल के लिए भेजे जा रहे हैं। बहुत जल्द ऑर्डर मिलने की भी उम्मीद है। अब भारतीय हथियार विदेश में बिकेंगे। यह हमारी फर्म का सौभाग्य होगा। बाकी सेना व पुलिस से करार पर लगातार वार्ता व ट्रायल जारी है।-मोहित शर्मा, निदेशक वेरीविन डिफेंस प्राइवेट लिमिटेड
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भारतीय बाजार में .9 एमएम बोर का हथियार सिर्फ सेना व पुलिस प्रयोग के लिए है, जबकि अमेरिका में यह बोर पब्लिक के लिए भी बेचा जा सकता है। इसलिए सबसे पहले इसकी आपूर्ति अमेरिका में देने की तैयारी तेजी से चल रही है।
ये हथियार बन रहे यहां
-मॉडल 431 पीडी .32 बोर रिवाल्वर
-मॉडल 60 .357 बोर रिवाल्वर
-मॉडल विक्टर 32 .32 बोर पिस्टल
-विक्टर 9 .9 एमएम विदेश निर्यात व सेना के लिए
अब तक बाजार में पहुंचे एक हजार हथियार
अलीगढ़ डिफेंस कॉरिडोर में बने हथियारों की बेसिक कीमत 1.80 लाख रुपये है। जिस पर 18 फीसदी जीएसटी के साथ भारतीय बाजार में 2.15 लाख रुपये अनुमानित कीमत रहती है। इसे कम ज्यादा फुटकर में भी बेचा जा सकता है।