प्रदेश में मुख्यमंत्री शिशिक्षु प्रोत्साहन योजना हाल ही में लागू हुई है, जिसके अंतर्गत पॉलीटेक्निक और आईटीआई से अलग अलग ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को फैक्ट्रियों में अप्रेंटिसशिप कराई जानी है।
अलीगढ़ में अभी तक इस योजना के तहत 144 औद्योगिक इकाइयों ने पंजीकरण कराया है। पýˆØð·¤ यूनिट को नियमानुसार कम से कम दो युवकों को प्रशिक्षण देना है। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को सात हजार रुपये महीने का न्यूनतम वेतन मिलेगा, जिसमें 15 सौ रुपये केंद्र सरकार और एक हजार रुपये राज्य सरकार देगी। इस तरह से ढ़ाई हजार रुपये सरकार की ओर से और बाकी 45 सौ रुपये फैक्ट्री स्वामी की ओर से दिये जाएंगे। जिला उद्योग केंद्र के अनुसार लगभग 12 सौ यूनिट ऐसी हैं, जिनका अभी तक पंजीकरण नहीं हुआ है। पहले ये योजना स्वैच्छिक थी, लेकिन अब अनिवार्य हो चुकी है। अब जिन इकाइयों ने इस योजना में युवाओं को प्रशिक्षण नहीं दिया, उनके खिलाफ अर्थदंड लगाया जाएगा।
उपायुक्त उद्योग श्रीनाथ पासवान ने बताया कि जिलाधिकारी इस मामले में गंभीर है। अगर 30 अगस्त तक बाकी इकाइयों ने पंजीकरण नहीं कराया तो उनके विरुद्ध अर्थदंड लगाया जाएगा। उन्होंने बताया कि योजना के अलग अलग ट्रेड में प्रशिक्षण प्राप्त युवकों को औद्योगिक उत्पादन का अनुभव कराया जाएगा। इसके बाद अगर फैक्ट्री प्रबंधन उनसे काम कराना चाहेगा, तो वह उन युवकों को नियुक्ति दे सकता है। फैक्ट्रियों में ये अप्रेंटिसशिप ट्रेड के अनुसार छह, 12 या 18 माह तक की अवधि की होगी, जिससे संबंधित युवा को पूरा अनुभव कराया जा सके। वह भविष्य में कहीं भी काम कर सके।