मडराक क्षेत्र के गांव हाजीपुर चौहट्टा से कारोबारी के अगवा बावर्ची की हत्या कर उसका शव गढ़मुक्तेश्वर में एक नाले में फेंक दिया गया। यह हत्या उसकी पत्नी ने अपने प्रेमी व उसके साथियों संग मिलकर की। फिलहाल पुलिस ने आरोपी पत्नी व उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। फरार तीन साथियों की तलाश चल रही है।
इंस्पेक्टर मडराक कुलदीप सिंह के अनुसार वाकया 12 अगस्त का है, जब शहर के प्रमुख कारोबारी स्वप्निल जैन के घर में बावर्ची का काम करने वाला 41 वर्षीय आशीष शर्मा शाम को ड्यूटी से घर आया और फिर लापता हो गया। मामले में 13 अगस्त को उसकी पत्नी ने मुकदमा दर्ज कराया कि अज्ञात लोग उसे मथुरा कट बाईपास से कार में अगवा कर ले गए हैं।
इस मामले में पुलिस ने जब गहराई से जांच शुरू की तो पत्नी पर ही संदेह गहराया। जांच में सामने आया कि पत्नी के उसके पति के दोस्त राम विहार, सासनी गेट के विनीत जादौन से संबंध थे। इन संबंधों का पति विरोध करता था। कई बार झगड़े भी हुए और कुछ दिन तक आशीष अपनी पत्नी व परिवार को लेकर कारोबारी के घर में ही रहा था। इसके चलते पत्नी व विनीत का मिलना जुलना बंद हो गया था, जबकि वे साथ रहने का मन बना चुके थे।
इन्हीं बंदिशों से आजिज आकर दोनों ने आशीष को ठिकाने लगाने की योजना बनाई। इसी योजना के तहत 12 अगस्त को ही वह अपने घर बच्चों को लेकर वापस रहने आई और विनीत ने अपने बहनोई अमरपुर लोधा के शिवा, बहनोई के भाई प्रदीप व एक अन्य छोटेलाल के साथ मिलकर इस हत्या की प्लानिंग बनाई।
घटना वाली शाम विनीत ने अपने बहनोई व साथियों को बुलाकर मथुरा कट से प्रदीप की क्रेटा गाड़ी में अगवा किया। इसके बाद उसे मारपीट कर अधमरा कर दिया। फिर वे उसे रात में ही बेहोशी की हालत में हापुड़ जिले में गढ़मुक्तेश्वर के पास एक नाले में फेंक दिया।
17 अगस्त को गढ़मुक्तेश्वर पुलिस ने वहां अज्ञात शव बरामद किया, जिसकी सूचना जब अलीगढ़ पुलिस को मिली तो शुक्रवार को आशीष की पत्नी व बड़े बेटे को मडराक पुलिस वहां ले गई। जहां दोनों ने उसकी पहचान कर ली।
चूंकि पानी में शव पड़ा होने के कारण बुरी तरह गल गया था, इसलिए वहीं उसका अंतिम संस्कार करा दिया गया। इंस्पेक्टर के अनुसार इधर, पुलिस ने महिला से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गई। इसके बाद पुलिस ने महिला के बयानों के आधार पर आरोपी विनीत को गिरफ्तार कर लिया। अभी शिवा, प्रदीप व छोटेलाल फरार हैं।
बच्चे मालिक के पास, नहीं मान रहे पिता की लाश
आशीष के तीन बच्चे हैं, जिनमें सबसे बड़ा बेटा करीब 17 साल का है, उससे छोटी बेटी 13 साल व फिर दस साल का बेटा है। पिता के गायब होने और मां की गिरफ्तारी के चलते उन्हें उनके पिता के मालिक ने अपने पास बुला लिया है। वे अभी वहीं रह रहे हैं। शुक्रवार को पुलिस अपने साथ बड़े बेटे को गढ़मुक्तेश्वर ले गई थी।
मगर लौटकर बड़े बेटे ने बताया है कि जो शव उन्हें दिखाया गया था, वह उनके पिता का नहीं लग रहा। वहां पुलिस ने जबरन दबाव बनाकर हमसे यह कहलवाया कि यह पिता का ही शव है, पहचान लो। मां ने भी देखते ही शव पहचान लिया था। मगर हमें देखने से नहीं लगा कि वह पिता का शव हो सकता है। मतलब बेटा अभी पिता की लाश मिलने को लेकर संतुष्ट नहीं है।