ऑपरेशन कन्विक्शन की एक वर्ष की समीक्षा में अलीगढ़ जिला सबसे ज्यादा सजा कराने में प्रदेश में पहले स्थान पर आया। मगर पुलिस की लचर विवेचना और कमजोर साक्ष्यों के चलते आए दिन संगीन अपराधों के मुकदमों में अपराधी छूट रहे हैं। इसी का परिणाम है कि पिछले करीब चार माह में साठ से अधिक मुकदमों में अभियोजन की ओर से हाईकोर्ट में अपील की गई है।
प्रदेश भर में ऑपरेशन कन्विक्शन चलाया जा रहा है, जिसमें पुलिस को संगीन मुकदमे चिह्नित करने होते हैं। फिर उनमें मजबूत पैरवी, समय पर गवाहों को पेश कराना, साक्ष्य पेश कराना आदि जिम्मेदारी होती है। अभियोजन स्तर से उन मुकदमों में मजबूत पैरवी की जाती है। इस ऑपरेशन का जुलाई में परिणाम जारी हुआ तो अलीगढ़ प्रदेश में पहले स्थान पर रहा। परिणाम आने के बाद जिला पुलिस ने खुद की पीठ ठोंकी और अभियोजन अधिवक्ता भी खुश नजर आए।
मगर इसके विपरीत जिले में उन मुकदमों पर पुलिस का ध्यान नहीं, जिनमें आरोपी बरी हो जाते हैं। इस बात की गवाही हाईकोर्ट में की जाने वाली अपील के आंकड़े दे रहे हैं। पिछले चार माह में साठ से अधिक उन संगीन अपराधों में अपील की गई है, जिसमें साक्ष्य थे और गवाह भी नहीं टूटे। मगर पुलिस की लचर विवेचना से अपराधी को संदेह का लाभ मिला।
डीजीसी फौजदारी चौ. जितेंद्र सिंह बताते हैं कि हमारे स्तर पर मुकदमों में सजा कराने का हर संभव प्रयास होता है। मगर जिन मुकदमों में गवाह पक्षद्रोही होते हैं। उनमें अपील पर कम ध्यान दिया जाता है। हां, मजबूत साक्ष्य और मजबूत गवाही के बावजूद मुकदमे में अपराधी अगर बरी हुआ है तो उसमें हमारे स्तर से अपील हाईकोर्ट में की जाती है। साठ से अधिक मुकदमे पिछले समय में अपील में भेजे गए हैं।