उन्होंने वापस आकर कार की मरम्मत कराई। मगर छह सितंबर को फिर यह समस्या हुई। इस पर अलीगढ़ में अधिकृत स्टेशन पर दिखाया तो यहां मरम्मत के बाद आश्वासन दिया गया कि अब भविष्य में खराबी नहीं आएगी। इसके बाद भी यह समस्या बनी रही। हेड ऑफिस में शिकायत के बाद भी जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने उपभोक्ता अदालत की शरण ली।
इस मामले में हेड ऑफिस से अदालत में जवाब दिया गया कि उन्होंने कार बनाई है, बाकी अधिकृत विक्रेता व सर्विस प्रदाता हैं। इसलिए उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं है। इतने कम समय में इतनी गाड़ी चली है और इस तरह उत्पाद गर्म होना सामान्य बात है। मगर अदालत ने माना कि बार-बार एक ही समस्या आई और उसका समाधान नहीं हो पाया। इसलिए कहीं न कहीं उस वाहन के निर्माण में तकनीकी खामी है।
इस मामले में अदालत ने फैसला सुनाते हुए अलीगढ़ के अधिकृत सर्विस प्रदाता मस्कट टोयोटा को मुकदमे से अलग किया और कार बेचने वाली ग्वालियर फर्म व निर्माता कर्नाटक फर्म को यह आदेश दिया है कि एक माह में या तो पुरानी कार बदलकर नई कार दें, या फिर उसकी कीमत रकम कुल 22 लाख 70 हजार 178 रुपये का अपील दायर करने की तारीख से भुगतान करने की तारीख तक नौ फीसदी ब्याज सहित भुगतान करें। साथ में पांच लाख रुपये आर्थिक क्षति व 35 हजार रुपये वाद व्यय का भुगतान करें।