कल्याण सिंह धुन के पक्के थे। जेब में त्यागपत्र लेकर 1962 में पहली बार चुनाव लड़े थे। पराजय के बाद उनको जमीन भी बेचनी पड़ी थी। कल्याण सिंह के करीबी रहे रणवीर सिंह राजपूत कहते हैं कि 1962 में पहली बार कल्याण सिंह विधान सभा का चुनाव लड़े थे। वह करीब साढ़े चार हजार वोट से बाबू सिंह यादव से हार गए थे।
चुनाव हारने के बाद उनको कुछ जमीन भी बेचनी पड़ी थी। वह कहते हैं कि कल्याण सिंह नगर पालिका स्कूल में शिक्षक थे। चेयरमैन शिव कुमार गुप्ता भी चुनाव लड़ रहे थे। वह चाहते थे कि कल्याण सिंह चुनाव नहीं लड़ें। इसका अंदेशा कल्याण सिंह को था, इसलिए वह त्यागपत्र जेब में रखकर चुनाव लड़े थे।
रणवीर सिंह राजपूत का कहना है कि 1962 में चुनाव के ठीक पहले ओले पड़े थे। इसकी वजह से लोधी-राजपूत बहुल कई गांवों में फसल को काफी नुकसान हुआ था। किसान फसल के चक्कर में मतदान करने नहीं गए और करीब साढे़ चार हजार मतों से कल्याण सिंह हार गए। यदि किसान मतदान करने गए होते तो स्थिति कुछ और होती।
अनवर खां से एक बार हारे, कई बार किया पराजित
रणवीर सिंह राजपूत कहते हैं कि 1980 में कल्याण सिंह कांग्रेस नेता अनवर खां से करीब 2300 मतों से हारे थे। परंतु बाद में वह अनवर खां को कई बार पराजित किए। रणवीर सिंह राजपूत का कहना है कि कल्याण सिंह ने अनवर खां को 1974, 1977, 1985, 1989 और 1991 के चुनाव में पराजित किया। इससे पूर्व 1967 और 1969 में चौधरी अमर सिंह को पराजित कर विधायक निर्वाचित हुए थे।