एनआईए के डीएसपी तंजील अहमद हत्याकांड के आरोपी पश्चिमी यूपी के कुख्यात अपराधी मुनीर के खिलाफ हत्या के दो मुकदमों में नियत तारीख पर गवाही नहीं हो सकी। एएमयू छात्र आलमगीर हत्याकांड और कारोबारी फहद हत्याकांड के दो मुकदमों में अलग-अलग विवेचक न्यायालय में गवाही के लिए तलब थे। मगर वे दोनों ही नहीं आ सके। इसलिए अब न्यायालय ने दोनों को पुन: तलब करते हुए चार मई की तारीख नियत कर दी है।
अपर सत्र न्यायालय में विचाराधीन इन मुकदमों में सभी गवाहों की गवाही हो चुकी हैं। अब पुलिस विवेचक स्तर के गवाह तलब किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कारोबारी फहद हत्याकांड में विवेचक रहे तत्कालीन इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सूर्यकांत द्विवेदी को तलब किया गया, जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसी तरह एएमयू के डीएसडब्ल्यू छात्र आलमगीर हत्याकांड में मुनीर से रिमांड के दौरान हथियार बरामद करने वाले तत्कालीन इंस्पेक्टर सिविल लाइंस सुनील कुमार वर्मा को तलब किया गया। ये अभी पुलिस सेवा में हैं। मंगलवार को इनकी तलबी की तारीख नियत थी, मगर दोनों ही नियत तारीख पर नहीं आए। अब इस मामले में 4 मई तारीख नियत की गई है। इस विषय में जानकारी देते हुए बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज चौहान ने बताया कि इन दोनों गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद मुकदमे जल्द निर्णय की दहलीज पर पहुंच जाएंगे।
महज हॉर्न बजाने से टोकने पर मारा था कारोबारी फहद को
ये वाकया 20 अक्तूबर 2014 की शाम का है, जब कारोबारी फहद अपनी पत्नी व बच्चे संग बाजार बाइक पर घर लौट रहे थे। तभी अमीर निशा के पास पीछे से बाइक पर आ रहे अपराधियों ने आगे निकलने के लिए बार-बार हॉर्न बजाया। इस पर फहद ने टोक दिया कि इतना हॉर्न क्यों बजा रहे हो। बस इसी बात पर फहद की पत्नी व बच्चे के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई। बाद में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान मुनीर व उसके बेहद करीबी दोस्त एएमयू के लॉ छात्र आशुतोष मिश्रा के रूप में हुई। आशुतोष की कुछ ही दिन बाद गिरफ्तारी हो गई। मगर मुनीर तंजील हत्याकांड के बाद गिरफ्तार हुआ और रिमांड पर फहद हत्याकांड स्वीकारा।
आशुतोष को थप्पड़ के बदले मारा था आलमगीर को
यह घटना 18 सितंबर 2015 की दोपहर एएमयू कैंपस के अंदर की है। एएमयू का डीएसडब्ल्यू छात्र आलमगीर बाइक पर जा रहा था, तभी उसे हमलावरों ने घेरकर कई राउंड फायरिंग कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस जांच में उजागर हुआ कि एएमयू छात्रों की एक बस यात्रा के दौरान आलमगीर व आशुतोष में झगड़ा हो गया था, जिसमें आलमगीर ने आशुतोष के थप्पड़ जड़ दिया था। इसी विवाद में खुन्नस चली आ रही थी। फहद की घटना में जब आशुतोष जेल गया तो उसके ही कहने पर मुनीर ने अन्य साथियों संग मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। खास बात है कि इस घटना में पान दरीबा में रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर से लूटी गई सर्विस रिवाल्वर का प्रयोग होना पाया गया था।