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अलीगढ़ः खाद्यान्न, तेल व दाल के बाद दवाओं के दाम में भी उछाल

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पेट्रोलियम पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं में मूल्य वृद्धि के बाद अब महंगाई का असर दवाओं पर भी देखा जा रहा है। डायबिटीज, लीवर, ब्लड प्रेशर के अलावा सामान्य समस्याओं की दवाओं की कीमत में पिछले दो-तीन महीनों में 30 से 40 फ़ीसदी हुई है। मेडिकल स्टोर संचालक राजीव वार्ष्णेय कहते हैं कि मूल्य वृद्धि के पीछे कच्चे माल की कीमतों में उछाल और माल भाड़े का खर्च बढ़ना है, जिसका असर दवाओं की कीमतों पर हुआ है। दूसरी ओर, जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे बुजुर्ग लोगों का कहना है कि खाद्य पदार्थों में महंगाई के बाद अब दवाओं पर हुई मूल्य वृद्धि के चलते घर का बजट प्रभावित हुआ है। लोगों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए कि वह दवाएं जो बढ़ती उम्र और वृद्धावस्था में होने वाली समस्याओं से संबंधित हैं उनके दाम कम करने के लिए नियमन करे।
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दवाओं की कीमत वर्ष 2020 में और 2021 में
जोराइमल एम वन 155- 188
ग्लाइकोमेट जीपी वन 95- 106
रेबीफास्ट 20, 108- 132
लिब 52 , 95-120
एजियूलिक्स एएम, 108- 118
एच 80, 83-103
एलमीकाइंड एच 40, 60-70
आटोकोर सीवी 145-160
डेवलेट 64-72
यूरोमैक्स डी 425-520
(यह दवाएं डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, लीवर, पेट की गैस आदि की समस्याओं से संबंधित हैं)
- स्रोत: रिटेल मेडिकल स्टोर संचालक के द्वारा बताए गए मूल्य
थर्मामीटर भी हुआ महंगा
दवाएं ही नहीं, हर घर में बुखार नापने के लिए रखे जाने वाला थर्मामीटर जो एक वर्ष पहले तक 150 रुपये (डिजिटल) का आता था। अब उसकी कीमत 250 रुपये तक पहुंच गई है। यही स्थिति वेपोराइजर की है। एक वर्ष पहले तक इसकी कीमत 100 रुपये थी लेकिन अब इसकी कीमत 150 रुपये तक पहुंच गई है।
एक वर्ष पहले के मुकाबले अब दवाएं महंगी हो गई हैं। यह सब सामान्य जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं की दवाएं हैं। थोक मार्केट में दाम बढ़े हैं, इसलिए इसका असर रिटेल मूल्यों पर भी हुआ है। मार्केट में इसके लिए कच्चे माल के दाम और माल भाड़ा बढ़ने को जिम्मेदार कहा जा रहा है
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- राजीव वार्ष्णेय, मेडिकल स्टोर संचालक
बढ़ती उम्र के साथ नियमित दवाओं का सेवन करना पड़ता है। प्रतिदिन इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं महंगी हो गई हैं, जिसका सीधा असर जेब पर पड़ रहा है। आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दाम पहले ही बढ़े हुए हैं। अब पेट भरें या सेहत को सुधारें।
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-कांति प्रसाद, मित्र नगर
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