जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में नवजात शिशुओं के इलाज के लिए एक बड़ी सौगात मिली है। 10 करोड़ रुपये की लागत से यहां एक अत्याधुनिक नियोनेटल यूनिट का निर्माण किया जाएगा। इस नई यूनिट के शुरू होने से अलीगढ़ सहित आसपास के जिलों के गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।
यह राशि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड से मिली है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
नियोनेटल कार्डियक सर्जरी की सुविधा :
इस यूनिट की सबसे बड़ी खासियत यहां होने वाली नियोनेटल कार्डियक सर्जरी होगी। अब तक दिल की बीमारी के साथ पैदा होने वाले बच्चों को दिल्ली या अन्य बड़े शहरों के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब जेएन मेडिकल कॉलेज में ही आधुनिक मशीनों के जरिए नवजात शिशुओं के दिल के ऑपरेशन संभव हो सकेंगे।
क्या होती है नियोनेटल यूनिट
इसे नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई भी कहा जाता है। यहां उन शिशुओं का इलाज किया जाता है जो समय से पहले पैदा हुए हों। जिनका जन्म के समय वजन बहुत कम हो। जिन्हें जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में दिक्कत या संक्रमण हो। इसके अलावा जिन्हें किसी जन्मजात बीमारी (जैसे दिल में छेद आदि) के लिए सर्जरी की जरूरत हो। इस यूनिट में इंक्यूबेटर्स होते हैं। ये कांच के विशेष बॉक्स होते हैं जो बच्चे के शरीर के तापमान को नियंत्रित रखते हैं। इसके अलावा फेफड़ों के पूरी तरह विकसित न होने पर कृत्रिम रूप से सांस देने की मशीन वेंटिलेटर सपोर्ट रहते हैं।
जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अंजुम परवेज ने बताया कि इस अत्याधुनिक यूनिट के बनने से शिशुओं के इलाज में और अधिक बेहतरी आएगी। हमारा लक्ष्य है कि नवजात शिशुओं को जन्म के तुरंत बाद होने वाली जटिलताओं से बचाने के लिए सर्वोत्तम तकनीक और देखभाल प्रदान की जाए।