न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
रेलवे जंक्शन की पार्किंग में एक्टिवा खड़ा करने को लेकर महिला पुलिसकर्मी और टीई के बीच हुए विवाद मामले में जीआरपी की गर्दन फंस गई है। इस मामले में टीई की ओर से यूनियन द्वारा दिलवाई गई तहरीर में आरोपी जीआरपी कर्मियों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। बुधवार को मामले में जांच करने आए सीओ जीआरपी रविकांत पाराशर और रेलवे यूनियन के अधिकारियों के बीच बंद कमरे में वार्ता हुई। सूत्रों की माने तो रेलवे यूनियन ने इस मामले में आरोपियों जीआरपी कर्मियों के तबादले की मांग रखी है। इसी शर्त पर उन्होंने आगे हंगामा या विरोध प्रदर्शन न करने की बात कही है।
जीआरपी सीओ रविकांत पाराशर सुबह नौ बजे के करीब रेलवे जंक्शन पर स्थित जीआरपी थाने पहुंचे थे। उन्होंने वहां जीआरपी कर्मियों से पूरा मामला जाना। इसके बाद वह यूनियन के नेताओं से बातचीत करने चले गए। सीओ ने टीई विश्राम सिंह से भी बातचीत की। इधर, मामला तूल पकड़ने के बाद अब जीआरपी और रेलवे कर्मियों के लिए वर्चस्व की लड़ाई बन गई है। हालांकि उच्चाधिकारियों के समझाने के बाद विवाद समझौते की कगार पर आ गया है। मगर, रेलवे कर्मचारी बिना जीआरपी कर्मियों पर कार्रवाई हुए चुप न बैठने की बात कह रहे हैं। नार्थ सेंट्रल रेलवे इम्प्लाइज संघ के शाखा महामंत्री एसके शुक्ला के अनुसार कार्रवाई का आश्वासन मिला है। उसी के आधार पर बुधवार को होने वाला विरोध प्रदर्शन टाला गया था।
बंद लिफाफा बना चर्चा का विषय
सीओ के जाने के बाद आगरा स्थित जीआरपी एसपी कार्यालय से दोपहर बाद एक बंद लिफाफा आने से जीआरपी कर्मियों में हलचल मच गई है। सूत्रों के अनुसार बंद लिफाफे में किसी का तबादला आदेश भी हो सकता है। दोपहर बाद यह चर्चा जोरों पर रही कि इस मामले में किस पर गाज गिरने वाली है।
सीओ रविकांत पाराशर को जांच सौंपी गई है। उन्होंने बुधवार को अलीगढ़ जीआरपी जाकर जांच भी की है। फिलहाल हमें जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
- अभिषेक यादव, एसपी जीआरपी