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सिर्फ एक वर्ष में 500 प्रतिशत बढ़ा डेंगू का प्रकोप

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
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पिछले दो दशकों में अगस्त से नवंबर महीने तक डेंगू लोगों में एक दहशत भरा शब्द रहता है। आंकड़े भी यही कहते हैं। वर्ष 2017 में जिला मलेरिया विभाग और स्वास्थ्य विभाग ने जहां डेंगू के 26 पुष्ट केस पाए गए। वहीं वर्ष 2018 में इन केसों की संख्या 124 तक हो गई। इस तरह एक वर्ष में ही डेंगू के केसों में 500 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई। गुरुवार को राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर यह बात विचारणीय है कि अब विभागीय और जनता के स्तर पर इसके प्रकोप से निपटने की क्या स्थिति रहेगी।


डेंगू के संबंध में लोगों को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की सिफारिश पर 16 मई को डेंगू दिवस का आयोजन किया जाता है। जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. राहुल कुलश्रेष्ठ कहते हैं कि एडीज रेप्टाई नाम के मच्छर से डेंगू फैलता है। यह संक्रामक इस अर्थ में है कि अगर डेंगू से ग्रस्त मरीज को कोई स्वस्थ मच्छर काट लेता है और उसके बाद वह मच्छर किसी अन्य व्यक्ति को काट लेता है तो वह व्यक्ति डेंगू का शिकार हो सकता है। पिछले कुछ वर्षों की बात करें तो वर्ष 2015 में पांच और 2016 में डेंगू के छह केस पुष्ट हुए थे। विभाग के मुताबिक अभी तक किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।
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जिले में 2006 में आया पहला केस
अलीगढ़ जिले में खैर सीएचसी में पहली बार डेंगू संभावित केस प्रकाश में आया। इसके बाद प्रत्येक वर्ष डेंगू की रोकथाम के लिए विभाग प्रयास करता है। डेंगू के मच्छर के पंखों पर सफेद धारियां होती हैं।
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सभी विभागों की है अब जिम्मेदारी
शासन स्तर पर निर्देश है कि अब डेंगू से रोकथाम की जिम्मेदारी सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की नहीं बल्कि नगर निगम, जल संस्थान, शिक्षा विभाग, मनोरंजन कर विभाग, सूचना विभाग, पंचायत विभाग, ग्राम विकास विभाग, नागरिक सुरक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, सिंचाई विभाग, वन विभाग, रेलवे, सिंचाई विभाग, बीएसएनएल आदि विभाग शामिल किए गए हैं। इसके तहत सभी की अंतर विभागीय जिम्मेदारी तय की गई है।
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