इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बाबा साहेब भोसले ने कहा है कि त्वरित न्याय दिलाने में हम सभी अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। ईश्वर से आज हमें जो मिला है, उसके अनुरूप उत्तरदायित्वों का पालन करें। उन्होंने कहा कि यूपी के न्याय संस्थान की तस्वीर उत्तर प्रदेश से बाहर बेहद खराब है। वजह है यूपी में 61 लाख मुकदमों का लंबित होना। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके लिए बड़ी जिम्मेदारी अधिवक्ताओं की हड़ताल को जाती है। हमें और अधिवक्ता समाज को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। वे शनिवार को यहां दीवानी न्यायालय परिसर में नए न्यायालय भवन और सीसीटीवी कंट्रोल रूम के शुभारंभ के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्य न्यायाधीश ने एडीआर भवन में आयोजित स्वागत समारोह में कहा कि यूपी से पहले वह मुंबई हाईकोर्ट, आंध प्रदेश हाईकोर्ट सहित अन्य राज्यों में भी तैनात रहे हैं। मगर जब यूपी की तैनाती की खबर उन्हें मिली तो वह खुद डर गए थे, क्योंकि यूपी से बाहर यूपी के अधिवक्ता व कोर्ट के सिस्टम को अच्छा नहीं बोलते।
मगर यहां आया। लोगों को देखा,समझा तो पता चला कि अच्छाई भी है। उन्होंने उदाहरण के तौर पर कहा कि सफेद चादर पर स्याही का दाग लगा हो तो चादर गंदी दिखती है। कुछ इस तरह की बुराई यहां से बाहर के लोगों को दिखती है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ जज के सामने जब उन्होंने यूपी की अच्छाइयां रखीं तो उनके सुझाव पर इन अच्छाइयों का एक पत्र तैयार कराया। यह पत्र प्रधानमंत्री ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के 100 वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में विमोचित किया और इस पत्र को देश के सभी प्रांतों में हाईकोर्टों में भिजवाया तो यहां की तस्वीर बदलती दिख रही है।
उन्होंने कहा कि हमसे लोगों को काफी अपेक्षाएं हैं। हमें लगातार सुविधाएं मिल रही हैं। आज भी नए भवन का शुभारंभ हुआ है, जहां सोमवार से काम शुरू हो जाएगा। इसके बाद भी निस्तारण ज्यादा न दे पाए तो गलती हमारी होगी।
उन्होंने कहा कि हमारी पहचान हमारे प्रोफेशन से है। अगर हम अपने नाम के आगे या पीछे से अधिवक्ता या जज हटा दें तो न हमें सम्मान मिलेगा न हमें पहचान मिलेगी। जब इस न्याय संस्थान ने हमें पहचान व सम्मान दिया है तो हमें भी इस संस्थान को कुछ तो देना होगा। मैं खुद से भी समय समय पर पूछ लेता हूं कि मैंने क्या दिया है।
उन्होंने हड़ताल का जिक्र करते हुए कहा कि हड़ताल से वादकारी पर असर पड़ता है। आप हड़ताल पर जा सकते हैं, मगर वादकारी या जज नहीं। आप एकजुट हैं, ताकत में हैं। इस ताकत का प्रयोग वादकारी को लाभ दिलाने में करो। अच्छा सोचो और अच्छी भावना रखो। उन्होंने कहा कि मैँ कई प्रांतों में रहा हूं। केसों का लंबन सभी जगह है। मगर यहां ज्यादा है। उन्होंने कहा कि वादकारी न्याय की भावना से आते हैं और हम पर भरोसा करते हैं। इसलिए हमारी जिम्मेदारी बनती है। हम आपके बिना कोर्ट नहीं चला सकते।
उन्होंने विधिक सेवा प्राधिकरण पर जोर देते हुए कहा कि एडीआर सिस्टम का दायरा बढ़ा है। अलीगढ़ में मीडिएटरों की कमी है। यहां ट्रेनिंग कैंप लगाकर मीडिएटर तैयार किए जाएंगे। इसमें अब जजों को भी मीडिएटर की भूमिका में लगाया जाएगा। ज्यादा से ज्यादा मुकदमे सुलह समझौते से निपटाए जाएंगे।
अन्य राज्यों में एडीए बेहद सफल भूमिका में है। यहां भी लाएं। आप हमारे पीछे रहेंगे तो हम खुद आगे हो जाएंगे। अन्यथा सुधार के लिए कोई बदलाव हुआ तो नुकसान भी सबसे ज्यादा आपका होगा। इस मौके पर हाईकोर्ट से आए प्रशासनिक न्यायाधीश आरडी खरे, वरिष्ठ न्यायाधीश शशीकांत गुप्ता, जिला जज श्रीमती कल्पना मिश्रा ने भी स्वागत समारोह को संबोधित किया।
इस आयोजन का संचालन विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अभिनितम उपाध्याय ने किया, जबकि एडीजे प्रथम मदनलाल निगम ने अंत में आभार जताया। आयोजन में रजिस्ट्रार जनरल हाईकोर्ट मो. फैज आलम खान, कमिश्रर सुभाष चंद्र शर्मा, डीएम ऋषिकेश भाष्कर याशोद, एसएसपी राजेश पांडेय, अलीगढ़ बार अध्यक्ष अमर सिंह यदुवंशी, सिविल बार अध्यक्ष सूरजपाल सिंहए यूपी बार काउंसिल के पूर्व चेयरमैन सुरेंद्र मोहन यादव ने अतिथियों का स्वागत किया।