इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दिलीप बाबा साहेब भोसले ने शनिवार को यहां दीवानी परिसर में बने नौ नए कोर्ट रूम भवन और सीसीटीवी कंट्रोल रूम का विधिवत पूजा अर्चना के साथ किया। इस मौके पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया और अधिवक्ताओं द्वारा समस्याएं रखे जाने पर उन्होंने दीवानी परिसर में भ्रमण कर दोनों बार सभागार और अधिवक्ता चैंबरों का भी जायजा लिया। स्वागत समारोह के दौरान उन्होंने इन समस्याओं के जल्द निस्तरण का भरोसा भी दिलाया।
दोपहर में यहां पहुंचे मुख्य न्यायाधीश ने सर्किट हाउस में मंडल भर के न्यायिक अधिकारियों संग औपचारिक बैठक की। इसके बाद शाम को वह काफिले के साथ घोड़ों और बाइकों की अगवानी में दीवानी न्यायालय के अनौना हाउस स्थित गेट नंबर पांच पहुंचे। यहां उन्होंने नए भवन, मैटल डिटेक्टर युक्त द्वार का फीता काटकर उद्घाटन किया।
इसके उपरांत पूजन के बाद शिलालेख का अनावरण करते हुए नए भवन का जायजा लिया। यहां से वह मीडिएशन सेंटर स्थित कंट्रोल रूम पहुंचे, जहां उन्होंने सीसीटीवी कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया। इस दौरान अधिवक्ताओं ने उनसे बार सभागार का जायजा लेने का अनुरोध किया तो वह पहले अलीगढ़ बार के अधूरे खड़े बार रूम गए और वहां से सिविल बार के रूम में गए।
जहां अधिवक्ताओं ने समस्याएं गिनाईं। इसके बाद उन्होंने अधिवक्ता चैंबर भी देखे। निरीक्षण के उपरांत उन्होंने स्वागत भाषण में शुरुआत में यही कहा कि अधिवक्ताओं की जो समस्याएं हैं, उन्हें नोट किया गया है। जल्द उनका निराकरण किया जाएगा।
इस मौके पर तमाम अधिवक्तागण, न्यायिक अधिकारी गण के अलावा एडीजे सुरेश चंद्रा, पीएन मिश्रा, सीताराम निगम, प्रमुख अधिवक्ता जेसी माहेश्वरी, जगदीश सारस्वत, कैलाश बाबू गुप्ता, गणेश शर्मा, मनोज शर्मा, सत्यदेव उपाध्याय, ब्रजेश सिंह, योगेश सारस्वत आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
बार पदाधिकारियों ने बार रूम का मुद्दा उठाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से मिलने दोपहर में सर्किट हाउस में अधिवक्ताओं का प्रतिनिधि मंडल पहुंचा। इस मौके पर बार अध्यक्ष व अन्य अधिवक्ताओं ने कहा कि बार के लिए एक हाल मिला हुआ था, जो कुछ वर्ष पहले गिर गया। जब उसका निर्माण शुरू कराया गया तो आधा निर्माण होने के बाद किन्हीं कारणों से रुकवा दिया गया। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने खुद दीवानी पहुंचकर यह बार रूम देखा और फिर इस समस्या के निस्तारण का भरोसा दिलाया।
घोड़ों, बाइकों से अगवानी, बैंड और गारद से सलामी
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दोपहर में ही सर्किट हाउस पहुंच गए थे। यहां से दीवानी तक उन्हें शाम को घोड़ों और बाइकों की टोली से लाया गया। यहां दीवानी परिसर में उनको पुलिस गारद व पीएसी बैंड ने सलामी दी।
मां बाप और भगवान को भी नहीं लॉर्डशिप का दर्जा
अलीगढ़। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के साथ आए हाईकोर्ट के ही वरिष्ठ न्यायाधीश शशीकांत गुप्ता ने स्वागत समारोह में कहा कि मां-बाप या भगवान को भी लॉर्डशिप का दर्जा नहीं है। यह दर्जा सिर्फ हमें और हमारे इस सिस्टम को है। वादकारी हम पर व अधिवक्ता समाज पर भरोसा करता है। इसलिए हमें यह भरोसा कायम रखना होगा।
उन्होंने अपनी अलीगढ़ से जुड़ी यादों का जिक्र करते हुए कहा कि उनका अलीगढ़ से नाता है। वह यहां वोट मांगने आया करते थे। उन्होंने कहा कि वादकारी वकील को अपनी फाइल दे जाता है और वकील उस वादकारी के लिए जान दिए रहता है।
यह एक दूसरे के प्रति भरोसा ही तो है। मगर बड़ी समस्या हड़ताल है। इस हड़ताल से नुकसान उस वादकारी को ही होता है, जो आप पर भरोसा रखता है और सुदूर से आकर पैरोकारी करता है। उन्होंने यहां ठंड, भक्ति और भरोसे की दोस्ती की कहानी सुनाते हुए कहा कि ठंड और वापस तो जाने के बाद वापस लौट सकते हैं। मगर भरोसा नहीं लौट सकता। उन्होंने जूनियर अधिवक्ताओं को सलाह देते हुए कि वह यहां अधिवक्ता बनने आएं, न कि नेता बनने। इस मौके पर प्रशासनिक न्यायमूर्ति आरडी खरे ने इस मौके पर हुए स्वागत पर सभी का आभार जताया।
दीवानी में प्रतिबंधित रहे वाहन
मुख्य न्यायाधीश के आगमन के मद्देनजर शनिवार केे दीवानी न्यायालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे। इस मौके पर वाहन पूरी तरह प्रतिबंधित रहे। सभी द्वारों से पैदल ही प्रवेश था। इसके अलावा शाम को मुख्य न्यायाधीश के सर्किट हाउस से दीवानी आने के दौरान रास्ते पर भी सुरक्षा के इंतजाम रखे गए। देर शाम सभी न्यायिक अधिकारी इलाहाबाद रवाना हो गए।