आशीष निगम, अमर उजाला, अलीगढ़।
मंडी परिषद प्रशासन की ओर से बनवाए जा रहे ग्रामीण सड़क मार्ग आठ साल की निर्धारित मियाद पूरी नहीं कर पा रहे। अधिकांश सड़कें इससे पहले ही दम तोड़ रही हैं। ऐसे में मंडी परिषद प्रशासन प्रमुख सचिव के आदेशों को दरकिनार कर आठ साल की जगह तीन साल में ही इन सड़कों को दोबारा से बना रहा है।
बस पहले और बाद में निकाले गए टेंडर में सड़कों के नाम में कुछ शब्दों का मामूली परिवर्तन किया जा रहा है। हकीकत में सड़कें वही हैं। यही नहीं तीन साल पहले अधिकारियों और ठेकेदार की जो टीम इस पर काम पर थी, उसी टीम ने इस बार भी काम किया।
मंडी परिषद प्रमुख सचिव के आदेशों के अनुसार ग्रामीण संपर्क मार्ग एक बार बनाए जाने के बाद आठ साल बाद ही दोबारा से बन सकते हैं। उन सड़कों की मियाद आठ साल तय है। इससे पहले सड़क को दोबारा से नहीं बनाया जा सकता है। जानकारों की मानें तो ये मामला सड़क निर्माण की आड़ में बड़े गोलमाल का है, जिसकी गहन जांच होने पर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई तय है।
मामला कुछ यूं है कि 3 अप्रैल 2013 को मंडी परिषद प्रशासन की ओर से कुछ सड़कों को बनाने का टेंडर निकाला गया। जिसमें हाथरस सासनी मार्ग पर सठिया से कन्या गुरुकुल तक का ग्रामीण संपर्क मार्ग 24 लाख रुपये में बना। इसी के साथ पराग डेयरी से सठिया तक की ग्रामीण सड़क 16 लाख रुपये में बनी। इन्हीं सड़कों को दोबारा से बनाने के लिए 16 मई 2017 को फिर से टेंडर निकला गया।
जिसमें कन्या गुरुकुल से ग्राम सठिया की सड़क 85 लाख और पराग डेयरी से सठिया तक 59 लाख रुपये में सड़क बनी। इस टेंडर को निकालने में सड़क की पहचान को बदलने के लिए कुछ शब्दों का फेरबदल किया गया। विभागीय सूत्रों के अनुसार सड़क वही है जो तीन साल पहले बन चुकी है।
इस संबंध में मंडी परिषद के डिप्टी डायरेक्टर कंस्ट्रक्शन से जब जानकारी की गई तो उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़क तीन साल बाद भी बनाई जा सकती है, लेकिन अगर उक्त प्रकरण में कहीं कोई गड़बड़ी की स्थिति है तो उसकी जांच कराई जाएगी।