उम्र के जिस पड़ाव पर अधिकांश लोग किताबों से दूरी बना लेते हैं, वहीं मौलाना डॉ. जहीर अहमद आज भी पढ़ाई को अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बनाए हुए हैं। 67 वर्ष की उम्र में भी उनका पढ़ने और नया सीखने का जुनून बरकरार है।
मुस्लिम इंटर कॉलेज, बुलंदशहर के पूर्व प्रधानाचार्य रहे डॉ. जहीर की शैक्षिक यात्रा वर्ष 1976 में हाईस्कूल से शुरू हुई, जो अब 33 डिग्रियों और विभिन्न प्रमाणपत्रों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने 67 वर्ष की उम्र में एमएड की डिग्री हासिल की है।
एक विषय तक सीमित नहीं रहा अध्ययन
डॉ. जहीर ने हाईस्कूल के बाद प्री-यूनिवर्सिटी कोर्स (कॉमर्स) और सीनियर सेकेंडरी की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद बीए, बीकॉम (ऑनर्स) और एमकॉम किया। उन्होंने अर्थशास्त्र, अंग्रेजी, उर्दू, हिंदी, संस्कृत, शिक्षा, समाजशास्त्र, इतिहास, राजनीति विज्ञान, दर्शनशास्त्र और लोक प्रशासन जैसे विषयों में परास्नातक की डिग्रियां हासिल कीं। इसके अलावा एमबीए (फाइनेंस एंड मार्केटिंग), बीलिब, एमलिब, एलएलबी, एलएलएम और एमएड जैसी उच्च एवं व्यावसायिक डिग्रियां प्राप्त कीं। कॉमर्स में उन्होंने पीएचडी भी की। अरबी में सर्टिफिकेट और डिप्लोमा, सांख्यिकी में डिप्लोमा तथा ग्रामीण विकास में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा भी हासिल किया।
आधुनिक शिक्षा के साथ पारंपरिक ज्ञान
डॉ. जहीर का अध्ययन आधुनिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने पारंपरिक उर्दू और इस्लामी शिक्षा में भी अध्ययन किया। उनकी योग्यताओं में मौलवी, अदीब-ए-कामिल, मुअल्लिम-ए-उर्दू, फाजिल (आलिम) और इफ्ता जैसी शैक्षिक योग्यताएं शामिल हैं।
शिक्षा सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं
अलीगढ़ के आमिर निशां स्थित मदनी होम में रह रहे डॉ. जहीर का कहना है कि उनके लिए शिक्षा सिर्फ नौकरी पाने का जरिया नहीं, बल्कि जीवनभर चलने वाली ज्ञानयात्रा है। उन्होंने बताया कि अब वह चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ से इस्लामिक स्टडीज विषय में एमए करने जा रहे हैं।