न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
सिर्फ छह पंक्तियों से संगीत के राग सीखे जा सकते हैं। सुनने और पढ़ने में अटपटा लग सकता है। मगर, संगीत के राग को सीखने का आसान तरीका तीन साल की कड़ी मेहनत बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के सुगम संगीत के शिक्षक जॉनी फॉस्टर ने खोजा है।
यूं तो करीब 200 से ज्यादा राग हैं, लेकिन चलन में करीब 32 हैं। इनमें सबसे ज्यादा राग यमन, बिलावल, दरबारी, भैरवी, बिहाग, भैरव, पीलू, देस, मालकोन्स, काफ़ी, धानी, भोपाली, जोगिया, पहाड़ी, रामकली, हमीर, चंद्रकौस, खमाज, मांड मेघ मल्हार, सोहनी, मारवा, बहार, भीम पलासी राग का इस्तेमाल उत्तरी भरतीय शास्त्रीय संगीत में होता है।
गीतकार जॉनी फॉस्टर का दावा है कि अभी तक किसी ने भी ऐसा आसान तरीका पंक्तियों के जरिये ढूंढा नहीं है। उनके इस खोज किए फार्मूले को लखनऊ, दिल्ली, मुंबई के कई संगीत विद्यालय में संगीत शिक्षक अपनाकर अपने विद्यार्थियों को राग की पहचान बता और सिखा रहे हैं।
राग-यमन (पहचान गीत)
1- तीवर मद्धम शुद्ध स्वरों के, साथ बड़ा खिल जाए है
2- ग नि वादी संवादी, राग यमन कहलाए हैं
3- थाट कल्याण जाति संपूरन, देर सांझ पे गाते हैं
4- नि रे ग रे, गर रे स स, प म रे ग गाते हैं
5- स रे ग म प ध सं सुर सारे हैं आरोही
6- सं नि ध प म ग रे स, सुर सजते हैं अवरोही
आरोह : सा रे गा म प ध नि सां
अवरोह : सां नि ध प म ग रे सा
थाट : कल्याण
जाति : संपूर्ण
वादी संवादी : ग नि
गायन समय : संध्या रात्रि प्रथम पहर
राग रंग : ऩि रे ग रे ऩि स, प म ग प म ग रे ग रे ऩि रे स
वर्जन फोटो
मैंने आसान शब्दों में राग की पहचान कराने का प्रयास किया है। छह पंक्तियों के गीत में राग के सभी आठ-नौ बुनियादी अंग (आरोह, अवरोह, थाट, जाति, वादी, संवादी, स्वर समूह, गाने का समय वर्जि स्वर) का समावेश किया है। -जॉनी फॉस्टर, गीतकार