न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
बैंकों के विलय, वेतन पुनरीक्षण में अनावश्यक देरी समेत अन्य मांगोें को लेकर बुधवार को बैंकों की देशव्यापी हड़ताल के तहत जनपद की 200 से अधिक बैंक शाखाओं में तालाबंदी रही। इस दौरान करीब 700 करोड़ का लेन देन प्रभावित रहा।
एटीएम जवाब दे गए तो छोटे व मझोले व्यापारियों को अपने सौदे काटने पड़े। इधर आक्रोशित बैंक कर्मचारियों ने यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस के बैनरतले स्टेट बैंक की घंटाघर मुख्य शाखा पर धरना प्रदर्शन कर केंद्र सरकार को जमकर कोसा।
बीते शुक्रवार को बैंक अफसरों की हड़ताल, शनिवार को चौथा शनिवार, फिर रविवार का अवकाश, सोमवार को बैंक खुलने के बाद मंगलवार को क्रिसमस और उसके अगले ही दिन बैंकों की देशव्यापी हड़ताल ने आम लोगों की हालत पतली कर दी है।
पांच दिन का यह अवकाश लोगों पर इस कदर भारी पड़ा है कि वे त्राहिमाम बोल गए हैं। हालांकि धीरे धीरे आन लाइन ट्रांजेक्शन चलन में आने से बड़ी खरीददारी एवं सौदों पर तो असर नहीं पड़ा है, लेकिन छोटे कामकाज एवं सौदे धनाभाव में लटक रहे हैं।
बुधवार को बैंकों की देशव्यापी हड़ताल के चलते बैंकों में ताले लटके होने के कारण लोग लेन देन को तरसते नजर आए। लगातार बैंकें बंद रहने के कारण एटीएम में कैश खत्म हो गया।
इसके चलते लोगों को थोड़ी-थोडी रकम निकालने के लिए भी मीलों का सफर तय करना पड़ा। इधर बैंकों के प्रदर्शन के दौरान यूनियन के संयोजक वीके शर्मा ने बताया कि बैंक अधिकारी व कर्मचारी देना बैंक, विजया बैंक तथा बैंक आफ़ बड़ौदा के विलय का विरोध कर रहे हैं।
कर्मचारियों को यह भी आशंका है कि अन्य बैंकों का भी सरकार विलय कर सकती है। वेतन पुनरिक्षण में अनावश्यक देरी की जा रही है और सरकार तथा भारतीय बैंक संघ अनुकूल वेतन वृद्धि के प्रस्ताव के साथ आगे नहीं आ रही है। इस मौके पर बड़ी संख्या में बैंककर्मी मौजूद थे।