न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रो. मिर्जा असमर बेग ने कहा कि वैश्वीकरण की अवधारणा पश्चिमी देशों से आई है, जो उपनिवेशवाद का ही एक नया रूप है।
वे टीकाराम कन्या महाविद्यालय में अंग्रेजी विभाग व आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के बैनर तले हिंदू गर्ल्स एजूकेशन सोसाइटी के सहयोग से ‘रिविजिटिंग न्यू इंडिया’: द ग्लोबल इम्पेक्ट आन कंटेंपरअरी लाइफ एंड लिट्रेचर ऑफ माडर्न इंडिया’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिन बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह तीसरी दुनिया के देशों का एक सहमतिपूर्ण किया गया शोषण है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक डॉ. अमरनाथ झा ने कहा कि वैश्वीकरण के बावजूद भारतीय विश्व में कहीं भी हाें, लेकिन वे अपनी सभ्यता व संस्कृति को नहीं भूले हैं। संस्कृति के बचाव में ही सभ्यता का बचाव निहित है। डीएस कॉलेज की डॉ. इंदु वार्ष्णेय ने कहा कि वैश्वीकरण से अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भारत का महत्व बढ़ा है। एएमयू की प्रो. समीरा खान ने कहा कि महिलाओं को अपने मुद्दे स्वयं ही चुनने होंगे। शिक्षाविदें का उत्तरदायित्व है कि वे महिलाओं के अधिकार दिलाने में उन्हें जागरूक करें।
सामाजिक बदलाव के लिए जुनून होना जरूरी है। डॉ. रमेश शिशु ने अपनी सभ्यता और संस्कृति को बचाते हुए वैश्वीकरण अपनाने पर बल दिया। एसवी कॉलेज की डॉ. नीतू कुलश्रेष्ठ, क्षेत्रीय निदेशक इग्नू डॉ. अशोक शर्मा ने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर डॉ. बीना अग्रवाल, डॉ. पीके कुश, डॉ. शीरीन शेरवानी आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. ममता श्रीवास्तव ने किया।