अलीगढ़ में लोधा क्षेत्र के वीरमपुर में मारे गए तीन दलितों के आश्रितों को आर्थिक मदद न मिलने में बजट की कमी आड़े आ रही है। एससी-एसटी एक्ट के तहत मिलने वाली आर्थिक मदद के लिए बजट ही नहीं है। ऐसे में मृतकों के आश्रितों को पांच-पांच लाख तथा घायल को तीन लाख यानी कुल 18 लाख रुपये देने की व्यवस्था टीआर-27 से की जा रही है। टीआर-27 से आर्थिक मदद का चेक भी तब कटेगा, जब डीएम अभिषेक प्रकाश चंडीगढ़ से लौटेंगे क्योंकि चेक पर उनके हस्ताक्षर होने हैं। इस बीच जेएन मेडिकल कालेज में भर्ती इस घटना के एक घायल का शनिवार को आपरेशन होना है लेकिन उसके पास धन की व्यवस्था नहीं है।
वीरमपुर में मारे गए तीन दलितों के आश्रितों को आर्थिक सहायता दिए जाने की पत्रावली समाज कल्याण विभाग की ओर से तैयार कराकर आला अफसरों को भिजवा दी गई और यह भी स्पष्ट कर दिया कि इस मद में बजट नहीं है। डीएम इन दिनों चंडीगढ़ में है। बजट न होने के कारण आर्थिक मदद के लिए धन कोषागार से जिलाधिकारी की विशेष वित्तीय शक्तियों के तहत धारा टीआर-27 से ही मिलेगा। यह अधिकार केवल डीएम का है और उन्हीं के हस्ताक्षर से चेक जारी होने हैं। सीडीओ/नगर आयुक्त शैलेंद्र कुमार सिंह के पास डीएम का चार्ज तो है लेकिन चार्ज देखने वाले अधिकारी के पास न तो नीतिगत फैसले लेने और न ही वित्तीय अधिकार होते हैं। डीएम के शनिवार देर शाम तक अलीगढ़ लौटने की संभावना है। उनके लौटने के बाद ही आश्रितों को आर्थिक सहायता के चेक मिल सकेंगे।
मृतकों के आश्रितों व घायल को आर्थिक मदद के संबंध में अमर उजाला से विशेष बातचीत में एससीएसटी आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीएल पुनिया ने कहा कि केंद्र सरकार से बजट आ गया लेकिन दलित उत्पीड़न के मामले में दलितों को मिलने वाली आर्थिक सहायता की धनराशि को उत्तर प्रदेश सरकार दूसरे मदों में खर्च कर रही है, जबकि इस राशि को जिलों को ही खर्च करना चाहिए। पुनिया ने कहा कि दलितों को आर्थिक मदद के लिए बजट न भेजना भी राज्य सरकार की बहादुरी ही कहा जा सकता है।
गांव से पलायन करेगा दहशतजदां परिवार!
पुलिस की भारी लापरवाही एवं संवेदनहीनता के कारण वीरमपुर कांड के पीड़ित परिजन गांव छोड़ने पर विचार कर रहे हैं। जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती प्रताप उर्फ कालू ने कहा कि गांव गया तो वे लोग मुझे मार देंगे। परिवार के जीवित सदस्यों की जान खतरे में है।
बुधवार को जमीनी विवाद में लोधा के गांव वीरमपुर में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की लाठी, डंडे, सरिया एवं फरसा से पीट कर हत्या कर दी थी। जबकि हैवानियत के शिकार परिवार का चौथा सदस्य प्रताप उर्फ कालू गंभीर रूप से घायल है और उसका जेएन मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है।
हमलावरों ने कालू को मृत समझकर छोड़ दिया था। पांच नंबर वार्ड में भर्ती कालू का कहना है कि वह अब गांव नहीं जाएगा। वहां लोग उसे जान से मार देंगे। पूरे परिवार को खत्म कर देंगे। वे लोग कुछ भी कर सकते हैं। 15 दिन पूर्व पुलिस के बुलाने पर मां के साथ लोधा थाने में गया था। वहां मां के साथ गाली-गलौज कर पुलिसकर्मियों ने भगा दिया। मुझे 151 में बंद कर दिया। गरीबों की सुनने वाला कोई नहीं हैं। प्रधान और गांव के लोगों के पास भी गया था कि दबंगो से बचाएं। लेकिन गरीब का साथ किसी ने नहीं दिया। मेडिकल में कालू की देखभाल मौसी एवं विवाहित बहन कर रही हैं। घटना की चर्चा पर सभी लोग सिहर उठते हैं।
एससीएसटी आयोग के चेयरमैन बोले
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-अनुसूचित जन जाति आयोग के चेयरमैन पीएल पुनिया का कहना है कि वीरमपुर कांड के लिए पुलिस, प्रशासन व राजस्व विभाग दोषी है। यदि पुलिस प्रशासन सही और समय पर कार्रवाई करता तो इससे बचा जा सकता था। उन्होंने कहा कि प्रदेश में दलित व महिला अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा है, जिसे रोक पाने में अखिलेश यादव सरकार पूरी तरह विफल है।
आयोग के चेयरमैन शुक्रवार को वीरमपुर में पीड़ित परिवार तथा जेएन मेडिकल कालेज में घायल से मिलने के बाद पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। पुनिया ने कहा कि दलित परिवार 13-14 साल से उस जमीन पर खेतीबाड़ी कर रहा था। आरोपी हमेशा कब्जा करने की कोशिश करते रहे और तहसील की मिलीभगत से कामयाब हो गए। पुलिस ने भी एकतरफा 107/116 की कार्रवाई कर दलितों को बंद कर दिया जबकि दोनों पक्षों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साफ है कि पुलिस, प्रशासन व तहसील कर्मचारियों ने आरोपियों का साथ दिया है और बड़ी घटना हो गई। इस कांड में घायल जेएन मेडिकल कालेज में भर्ती है, उसका आपरेशन होना है, उसके लिए पैसा नहीं दिया। डीएम एसएसपी से वार्ता कर कठोर कार्रवाई का अनुरोध किया है। आयोग इसकी समीक्षा करेगा और रिपोर्ट लेता रहेगा। मृतकों के आश्रितों को पांच-पांच लाख तथा घायल को तीन लाख रुपये देने को कहा है।
पुनिया ने कहा कि प्रदेश में दलितों व महिलाओं पर अपराध की बाढ़ आ गई है। रिपोर्ट लिखी नहीं जा रही हैं। पीड़ित को 156 (3) के तहत न्यायालय की शरण लेकर रिपोर्ट लिखानी पड़ रही है। प्रदेश स्तर पर संवेदनशीलता का अभाव है।
मृतक की पत्नी ने 100 नंबर पर दी थी सूचना
पुनिया ने बताया कि वीरमपुर में जिस समय आरोपी पक्ष दलित परिवार के सदस्यों की हत्या कर रहा था, उसी समय मृतक कैलाश की पत्नी परिवेश ने अपने मोबाइल फोन से 100 नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दी थी। यही नहीं आरोपी पक्ष ने भी 100 नंबर पर फोन से सूचना दी कि गांव में बदमाश आ गए हैं। 100 नंबर पर मिली सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दो लोगों को पकड़ा तथा हत्या में प्रयुक्त फरसा भी बरामद किया।