मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिले की तेरह परियोजनाओं को मंगलवार को शुरू किया।
इनमें से आठ नोएडा और पांच ग्रेटर नोएडा व यमुना से जुड़ी हैं।
ढाई हजार करोड़ रुपये से अधिक की इन परियोजनाओं का श्रीगणेश करने के लिए मुख्यमंत्री ने जिले में कदम नहीं रखा, बल्कि लखनऊ से ही शिलान्यास और उद्घाटन कर दिया।
यह विषय सरकारी दफ्तरों और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय रहा। इन चर्चाओं में कई तरह की बातें निकलकर सामने आ रही थीं।
उसमें से एक यह मिथ्या भी शामिल है कि जो भी मुख्यमंत्री नोएडा आता है, सत्ता उससे दूर चली जाती है। वह चाहे वीर बहादुर सिंह का कार्यकाल हो या मुलायम सिंह का पुराना कार्यकाल रहा हो या फिर पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का।
नोएडा में कदम रखने के बाद हुए चुनाव में दोबारा सत्ता हाथ नहीं लगी या सत्ता पर खतरा रहा। यही वजह रही कि पूर्व के मुख्यमंत्रियों ने नोएडा आने से दूरी बनाए रखी। शायद मौजूदा मुख्यमंत्री के दिमाग में भी यही पूर्वाग्रह बन गया है।
वहीं, कुछ लोगों का अनुमान है कि यहां आने जाने और कार्यक्रम के आयोजन में लगने वाले भारी भरकम खर्च को बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने यह कदम उठाया है। जैसा कि लैपटॉप और कन्या वितरण धन बांटने के लिए कार्यक्रमों के नाम पर बड़ी धनराशि बर्बाद होने का मामला उठ चुका है।
हालांकि सपा के महानगर प्रवक्ता राघवेंद्र दूबे भी मान रहे हैं कि अगर मुख्यमंत्री यहां आकर इन परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करते तो सरकार को लेकर जनता में और अच्छा संदेश जाता। हालांकि सरकार का मुख्य मकसद है कि जनता का कल्याण होना और वह इन परियोजनाओं से जाएगा।
वहीं, सभी परियोजनाओं का शिलान्यास व उद्घाटन का शिलापट लगाने के लिए मौके पर काम शुरू हो गया है। सेक्टर 39 स्थित जिला चिकित्सालय, सेक्टर 18 स्थित मल्टीलेवल पार्किंग सहित अन्य परियोजनाओं का शिलापट लगाने का काम मौके पर दिखा। वहीं, सेक्टर 123 स्थित एसटीपी का उद्घाटन कर दिया गया। बहुत जल्द यहां से सीवरेज का ट्रीटमेंट भी शुरू हो जाएगा।