सपा प्रमुख से एक हफ्ते में सरकार का चेहरा बदलने का वादा करने के बाद सीएम अखिलेश यादव ने शुक्रवार को आईएएस वीक के दौरान अफसरों को खासी झाड़ लगाई। उन्होंने कहा कि मैं नम्रता से बात करता हूं तो इसका मतलब ये नहीं है कि अफसर लापरवाही बरतें। सम्मान देना जानता हूं तो दंड देना भी आता है। लेकिन उन मुख्यमंत्रियों में नहीं हूं जो अफसरों से तू-तड़ाक के लहजे में बात करें।
दो रोज पहले ही अखिलेश ने नौकरशाहों पर कड़ा एक्शन लिया था। विधानभवन के तिलक हॉल में आईएएस वीक के दौरान सीएम ने अफसरों से निवेश का माहौल बनाने के लिए कानून-व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा तो योजनाओं और विकास कार्यों को पूरा करने को पुचकारा भी। आईएएस अफसरों को विकास कार्यों के लिए मिलकर काम करने की नसीहत दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी आईएएस काडर की पहले एक गरिमा थी। अब इसमें गिरावट आ रही है। पहले केंद्र सरकार में बड़े पदों के लिए इंपैनलमेंट होता था तो यूपी से कई अफसर लिए जाते थे। अब इसमें कमी आ रही है। ऐसा काम कीजिए जिससे आईएएस काडर की प्रतिष्ठा बढ़े।
पिछली सरकार में ऐसा करते तो क्या सुलूक होता?
सीएम ने बैठक में एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि कानपुर में उनसे एक पुल बनवाने की घोषणा यह कह कर करवा दी गई कि यह योजना पहले से मंजूर है लेकिन बाद में पता चला कि यह योजना दूसरे जिले के लिए है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी यहां बैठे हैं।
अगर यही काम पिछले मुख्यमंत्री के कार्यकाल में हुआ होता तो आप सोच सकते हैं कि आपके साथ कैसा व्यवहार होता। उन्होंने कहा कि अफसर अपने अधीनस्थों पर नियंत्रण रखें। जहां जरूरी हो तो आगे बढ़कर फैसला लें।