उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों की समस्याएं सुनने के लिए दिल्ली दरबार लगाया।
यूपी सदन में लगभग दो घंटे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों से मिले। इस दौरान क्षेत्रीय अधिकारियों से भी उन्होंने मुलाकात की। लोगों ने मुख्यमंत्री की इस पहल को काफी सराहा है।
उनका कहना है कि लखनऊ दूर होने के चलते उनकी बात नहीं सुनी जाती थी, लेकिन अखिलेश की इस पहल से उनकी बात कम से कम सुनी तो जा रही है।
लोगों का यह भी कहना है कि अखिलेश ही शायद ऐसे पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने इस तरह की पहल दिल्ली से की है। वरना ज्यादातर मुख्यमंत्री लोगों से लखनऊ में ही मिलना पसंद करते थे।
आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों तक पहुंचने की अखिलेश की यह कसरत काफी अहम मानी जा रही है।
बृहस्पतिवार को बड़ी संख्या में लोग यूपी सदन पहुंचे थे। मुख्यमंत्रियों ने फरियादियों की बात सुनी और संबंधित अधिकारी से भी बात की। कुछ से उनकी मांग से संबंधित कागज लिए, तो कुछ का काम घटनास्थल पर ही करवा दिया। कई लोगों को जल्द काम होने का भरोसा भी मिला।
मुख्यमंत्री पिछले कुछ समय से जब भी दिल्ली आते हैं तो एक दिन पहले ही एनसीआर के नेताओं को इसकी सूचना दे दी जाती है। साथ ही इन नेताओं को अपने इलाके के जरूरतमंद लोगों को लाने के लिए भी कहा जाता है, जिन्हें मुख्यमंत्री से कुछ न कुछ काम होता है।
पहले से ही गाजियाबाद, नोएडा समेत एनसीआर के आला अधिकारियों को दिल्ली बुला लिया जाता है।
पहले यह बैठक छोटे स्तर पर होती थी। मगर इसकी लोकप्रियता बढ़ गई है और बड़ी तादाद में नेता और जनता सीएम के दरबार में पहुंचने लगे हैं। इसलिए अब इसका आयोजन पंडारा रोड निवास की जगह यूपी सदन के कांफ्रेंस हॉल में किया जाता है।