मैनपुरी। एक तरफ जहां लोग पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. पदम सिंह ‘पदम’ पर्यावरण संरक्षण के लिए पौधे लगा रहे हैं। उन्होंने औषधीय, मसाले और फलदार वृक्षों की वाटिका तैयार की है। इसे युग बोध वाटिका का नाम दिया है।
करहल विकास खंड के गांव सिंहपुर निवासी डॉ. पदम सिंह का कहना है कि पर्यावरण की रक्षा में सबसे अहम योगदान पेड़ों का है। हम अधिक से अधिक पौधरोपण कर पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं। इसी उद्देश्य से उन्होंने गांव सिंहपुर में एक बीघा जमीन में युग बोध वाटिका तैयार की है।
इस वाटिका में डॉ. पदम ने कई प्रजातियों के औषधीय, मसाले, फलदार और फूलों वाले पौधे संरक्षित किए हैं। युग बोध वाटिका में लगे पेड़-पौधों को देखने के लिए प्रदेश भर से अधिकारी और लोग पहुंचते हैं। डॉ. पदम सिंह पर्यावरण की रक्षा के लिए आज भी गांव में ही रहते हैं जबकि उनके पुत्र कस्बा करहल में निवास करते हैं।
गोष्ठियों का करते हैं आयोजन
पर्यावरण रक्षा के लिए डॉ. पदम सिंह पदम न केवल पौधरोपण कर रहे हैं बल्कि वर्षभर जगह-जगह गोष्ठियों का आयोजन कर कविताओं के माध्यम से लोगों को पर्यावरण रक्षा का संदेश देते हैं। गंदगी न करने और पर्यावरण का प्रदूषण से बचाने के लिए वे कई लोगों को अपने साथ भी जोड़े हुए हैं।
वाटिका में ये पौधे हैं संरक्षित
डॉ. पदम सिंह की युग बोध वाटिका में 150 प्रजातियों के पौधे संरक्षित हैं इनमें मुख्य रुप से इंसुलिन, अश्वगंधा, आलू बुखारा, आडू, कल्पवृक्ष, दालचीनी, कमरख, पिस्ता, काजू, लीची, तेजपत्ता, अक्षयतरू, हींग, मौलश्री, अपराजिता, लोंग, सिंदूर, कपूर, अर्जुन, गिलोह, हर सिंगार, रुद्राक्ष, अंगूर, अनार, शरीफा, आंवला, इलाइची, अंजीर, कदंब, शमी आदि शामिल हैं।