इस तरह बनाई रणनीति
शुरुआत में ही उसका बायोमैट्रिक डाटा लिया गया था। इसमें उसका थंब इंप्रेशन, फोटो आदि शामिल था। ये डाटा आवेदन के वक्त उपलब्ध कराए गए डाटा से मैच नहीं किया। तब इस डाटा की फोरेंसिक जांच कराई गई। इसमें स्पष्ट हो गया कि आवेदन करने से लेकर लिखित व शारीरिक दक्षता परीक्षा देने वाला शख्स कोई और था।
एसपी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज
रिंकू सिंह परीक्षा में शामिल ही नहीं हुआ। फर्जीवाड़ा के संबंध में एसपी की तहरीर पर धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार कर इस्तेमाल करने, साजिश रचने आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। विवेचना कर पुलिस अब उसके बारे में जानकारी जुटाएगी, जिसने रिंकू की जगह पर परीक्षा दी।
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दस लाख में की डील, आवेदन में लगाई मार्फ फोटो
सॉल्वर के जरिये परीक्षा पास करने वाले रिंकू यादव ने भर्ती के लिए करीब दस लाख रुपये की डील की थी। इसलिए आवेदन के वक्त ही नाम, पता समेत अन्य जानकारी रिंकू की थी। बायामैट्रिक डाटा सॉल्वर का था। साजिश में आरोपी काफी हद तक कामयाब भी हो गए थे। मगर, ट्रेनिंग के वक्त जब सत्यापन किया गया तब ये फंस गया। आवेदन फार्म में फोटो इस तरह से मिक्स करके लगाई गई थी, जिसे आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता था।
आगरा ट्रांसफर किया जाएगा केस
भर्ती बोर्ड का मुख्यालय लखनऊ में है। इसलिए यहां पर केस दर्ज किया गया है। चूंकि आरोपी आगरा का है, इसलिए केस भी आगरा ट्रांसफर किया जाएगा। आगरा पुलिस ही केस की विवेचना करेगी। इसके पहले जो भी मामले इस तरह के सामने आए। उसमें मुकदमा यहां हुआ और विवेचना संबंधित जनपद की पुलिस ने की। उधर, आरोपी युवक के गांव में भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोग यही कह रहे हैं कि परीक्षा दी थी। इससे ज्यादा कोई मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं हैं।
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