वर्ष 1983 क्रिकेट विश्व कप की विजेता टीम के सदस्य रहे पूर्व बल्लेबाज यशपाल शर्मा के निधन की जानकारी से आगरा का क्रिकेट जगत भी स्तब्ध रह गया। मंगलवार को जैसे ही उनके निधन की सूचना मिली, आगरा में उनके द्वारा खेली गई क्रिकेट की यादें ताजा हो उठीं। टीम इंडिया के मध्यमक्रम के दाएं हाथ के पूर्व बल्लेबाज यशपाल शर्मा 1980 से 1998 तक देश में पहचान बना चुके शहीद स्मृति क्रिकेट टूर्नामेंट में खेलने आते थे।
एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में होने वाले मैचों में देश के सभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर खेलते थे। उस दौर में यशपाल शर्मा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की ओर से खेलते थे। उन्हें मैदान में सामने से खेलते देखने के लिए स्टेडियम एक घंटा पहले ही भर जाता था। पूर्व क्रिकेटर और कोच केके शर्मा बताते हैं कि यशपाल शर्मा मैदान में जितने आक्रामक दिखते थे, व्यक्तिगत जीवन में उनका व्यवहार उतना ही सौम्य था।
पूर्व रणझी खिलाड़ी सर्वेश भटनागर का कहना है कि उस दौर की क्रिकेट में उन्होंने यशपाल शर्मा से काफी कुछ सीखने की कोशिश की। उनके निधन पर डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ आगरा (डीसीएए) के अध्यक्ष पूरन डाबर, सचिव प्रकाश कौशल, संयुक्त सचिव तपेश शर्मा, कॉसमॉस एकेडमी के कोच फिरोज खान, मनोज कुशवाहा, अंपायर सुधीर चतुर्वेदी, मोहम्मद सद्दीक, कमल कपूर आदि ने दुख प्रकट किया है।
कड़ी मेहनत से मिलता है मुकाम
शहीद स्मृति क्रिकेट टूर्नामेंट में कमेंट्री करने वाले शहर के अंपायर नरेंद्र शर्मा का कहना है एक मैच के दौरान लंच के समय यशपाल शर्मा से हुई बातचीत में उन्होंने कहा था कि कड़ी मेहतन, लगन और परिश्रम ही सफलता ही सबसे बड़ी कुंजी हैं। शर्मा बताते हैं कि शहीद स्मृति में खेलने के लिए यशपाल शर्मा 1986 से लगातार चार-पांच साल मैच खेलने आए।
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