टूंडला। कालिंदी उफान पर है, निरंतर जलस्तर में वृद्धि हो रही है। बुधवार को कालिंदी जलस्तर डेढ़ से दो फीट तक बढ़ गया। इसके चलते किसानों की दर्जनों बीघा फसल कालिंदी में समा गई। जलस्तर के अभी और बढ़ने की सूचनाओं से यमुना तलहटी क्षेत्र के किसानों के होश उड़े हुए हैं। किसानों का कहना है कि तीन से चार फीट पानी और बढ़ा तो फसलें तो नष्ट हो ही जाएंगी इसके साथ ही गांव तक पानी पहुंच जाएगा।
पिछले एक हफ्ते से कालिंदी का जलस्तर निरंतर बढ़ रहा है। कालिंदी का जलस्तर बढने से किसानों की खादरों में स्थित कई बीघा बाजरा, मक्का, तिलहन व सब्जियों की फसल जलमग्न हो चुकीं हैं। पिछले दो दिन से चार से पांच इंच जलस्तर बढ़ रहा था। बुधवार सुबह अचानक जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो गई। सायं तक बढ़ता जलस्तर दो फीट तक पहुंच गया।
अचानक बढ़ते जलस्तर से किसानों के होंश उड़ गए हैं। किसानों की जो फसलें मंगलवार सांय तक आधी डूबी हुई थीं, वे अब जलमग्न हो गई हैं। बुधवार को निचले क्षेत्रों के ग्रामीण कालिंदी पहुंचकर बढ़ते जलस्तर का जायजा लेते रहे। हालांकि अभी बाढ़ का पानी उनके गांव तक नहीं पहुंचेगा। फिर भी ग्रामीण सतर्क रहते हुए बढ़ते जल स्तर पर नजर रखे हुए हैं।
जलस्तर बढ़ने से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्र
टूंडला। कालिंदी में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए खादरों की फसलों को नुकसान पहुंचने वाले कई गांव हैं। इसके साथ ही सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में तलहटी में बसे कुतुकपुर साहब, नगला काले, रामगढ़, भीकनपुर बझेरा, जटपुरा शामिल हैं।
नाव डूबी तो ट्रैक्टरों के ट्यूबों को बनाया नाव
टूंडला। टूंडला क्षेत्र के ग्रामीणों की यमुना खादरों में अधिकतर खेती कालिंदी के पार है। यमुना में अधिक पानी न होने पर वे छोटी नाव व तैरकर अपने खेतों तक पहुंचते थे, किंतु अब यमुना में बाढ़ जैसे हालात हैं। इससे उनकी अधिकतर नावों में पानी भर गया है तथा यमुना किनारे जलमग्न खड़ी हैं। ऐसे में ग्रामीणों ने ट्रैक्टरों के चार बड़े ट्यूबों में हवा भरकर नाव का रूप दे दिया है। इसी से वे यमुना पार जाकर पशुओं के लिए चारा ला रहे हैं तथा खेतों की रखवाली कर रहे हैं।