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यमुना में दीवार, नदी को मिट्टी से पाटा

Sat, 13 Aug 2016 12:52 AM IST
अमर उजाला आगरा
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एनजीटी - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से लोकल कमिश्नर के तौर पर नियुक्त एडवोकेट मुकेश कुमार गुप्ता ने शुक्रवार को यमुना किनारे के छह प्रोजेक्टों की नापजोख कराई। डूब क्षेत्र निर्धारण को सिंचाई विभाग द्वारा लगाए गए पिलरों से इनकी दूरी व फ्लड प्लेन लेवल को देखा। इसमें मंगलम एस्टेट और पीजी कालेज (जगदंबा) के निर्माण नदी में देखकर वे हैरान रह गए। इन निर्माणों को डूब क्षेत्र से बचाने के लिए नदी को मिट्टी से पाटने का संशय व्यक्त किया। इससे बिल्डरों में हड़कंप मच गया है। वे जल्द ही एनजीटी के समक्ष अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
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ट्रिब्यूनल के निर्देश पर डूब क्षेत्र के सीमांकन वाले इलाके में लगे खंभों की स्थिति, नदी किनारों और परियोजनाओं से इनकी दूरी की पड़ताल लोकल कमिश्नर ने दोपहर लगभग 12 बजे से शुरू की। यह नापजोख शाम लगभग छह बजे तक चली।
सबसे पहले दयालबाग स्थित पुष्पांजलि सीजन्स की नापजोख करने पहुंचे। लेकिन इसकी नापजोख पूरी हुए बगैर ही पूरा अमला यमुना किनारे बने तनिष्क राजश्री प्रोजेक्ट को देखने पहुंच गया। यहां खंभों से प्रोजेक्ट की दूरी और फ्लड प्लेन लेवल की नापजोख हुई।
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मंगलम एस्टेट एक्सटेंशन की दीवार नदी में खड़ी देख वे हैरान रह गए। इसकी कई बार दूरी नपवाई गई। पाया कि यह प्रस्तावित प्रोजेक्ट नदी के फ्लड लेवल से तीन मीटर नीचे है। साथ उन्होंने मिट्टी का भराव और कंकरीट की दीवार नदी में होने की बात कही।
उन्होंने माना कि कल्याणी हाईट्स के पास मंगलम एस्टेट एक्सटेंशन के लिए बनी आरसीसी की पूरी दीवार नदी में है। पुष्पांजलि हाईटस नदी से सिर्फ 33 मीटर दूर मिला। इसी तरह पीजी कालेज (जगदंबा) नदी से सिर्फ साढ़े पांच मीटर ही दूर मिला। इस पर उनके वकील की दलील थी कि यमुना ने अपना रुख बदल लिया है, इसकी वजह से कालेज की दीवार नदी में दिखाई दे रही हैं।
इससे पहले सर्किट हाउस में उन्होंने सिंचाई विभाग, आगरा विकास प्राधिकरण, नगर निगम, प्रशासन, राजस्व विभाग आदि विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। अगली सुनवाई 19 अगस्त को है। इससे पहले अपनी रिपोर्ट एनजीटी को सौंप देंगे।
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