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विश्व जल दिवस: कहीं हो रही पानी की बर्बादी तो कहीं जूझ रही आबादी, ऐसा है ताजनगरी का हाल

Tue, 22 Mar 2022 06:24 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

आगरा को जरूरत से ज्यादा गंगाजल मिल रहा है, फिर भी हजारों लोग पानी के लिए जूझते हैं। इसकी वजह बदइंतजामी मानी जा रही है। शहर के जिन इलाकों में पाइपलाइनों में बिछी है, वहां एक साल में 3400 से ज्यादा लीकेज हुए हैं। लाखों लीटर पानी बर्बाद हुआ है। 
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पाइपलाइन लीकेज से बर्बाद रहा पानी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ताजनगरी में भूगर्भ जल खारा है। यहां गंगाजल भरपूर और जरूरत से ज्यादा पहुंच रहा है, लेकिन 27 वार्डों में पाइपलाइन नहीं बिछी है। जहां बिछी है, वहां लीकेज के कारण आए दिन पानी की बर्बादी होती है। बुलंदशहर के पालड़ा से गंगाजल आया, लेकिन वाटरवर्क्स तक। शहर के 3.20 लाख घरों में से लगभग 1.50 लाख घरों में पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन नहीं है। 
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18 वार्ड ही ऐसे हैं, जहां हर घर में पाइपलाइन है और 55 वार्ड मिश्रित हैं, जहां कुछ हिस्सों में पाइपलाइन है, कुछ में नहीं। नल से जिन 1.50 लाख घरों में गंगाजल नहीं पहुंच रहा, वह भूगर्भ जल पर आश्रित हैं, पर  यह भूगर्भ जल खारा है। भूगर्भ जल हर साल यह दो से तीन फुट तक नीचे उतर रहा है, जिस वजह से सबमर्सिबल पंप और बोरिंग फेल हो रही हैं।

कवायद के बाद भी गिर रहा भूगर्भ जलस्तर

भूगर्भ जल विभाग ने मानसून से पहले और मानसून के बाद जिले के 15 ब्लॉक में भूगर्भ जलस्तर मापकर रिपोर्ट तैयार की है। स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब खोदने आदि कवायदों के बाद भी 6 ब्लॉक में भूगर्भ जलस्तर नीचे उतरा है। इनमें पिनाहट, शमसाबाद, एत्मादपुर, जैतपुर कलां, जगनेर और बरौली अहीर ब्लॉक हैं।

शहर के अमरपुरा, केके नगर, कमला नगर, तोरा, बल्केश्वर, बोदला, सिकंदरा, दौरेठा, आवास विकास कॉलोनी, दयालबाग, शाहगंज आदि क्षेत्रों में भी भूगर्भ जलस्तर में एक से तीन मीटर की गिरावट दर्ज की गई है। 

आगरा के आंकड़े 

3.20 लाख घर हैं शहर में
350 एमएलडी मिल रहा गंगाजल
260 एमएलडी की है इस समय जरूरत
2031 तक पूरे शहर की जरूरत हो सकती है पूरी
10 लाख लोग भूगर्भ जल पर निर्भर
300 लीकेज हो रहे हर महीने

3400 से ज्यादा लीकेज में बर्बाद हुआ पानी

ताजनगरी में जिन जगहों पर पाइपलाइन हैं, उन इलाकों के लोगों को भी पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। दरअसल, पाइपलाइनों में इस एक साल में 3400 से ज्यादा लीकेज हुए हैं। औसतन 10 से 12 लीकेज की मरम्मत हर दिन की जाती है। सबसे ज्यादा लीकेज जीवनीमंडी वाटरवर्क्स के हैं, जहां दिसंबर से मार्च के तीन माह में पांच बार 28 इंच की लाइन की मरम्मत करनी पड़ी और इसके लिए 10 दिन जलापूर्ति ठप रही। 

इसके अलावा बालूगंज में जलनिगम की खोदाई में तीन बार 18 इंच की लाइन तोड़ दी गई तो छीपीटोला, आवास विकास, सिकंदरा, बोदला रोड और आगरा किला के पास पाइपलाइन टूटने से 15 दिन तक जलापूर्ति पर असर पड़ा।

जीवनीमंडी में लाइनें सबसे जर्जर 

जीवनीमंडी वाटरवर्क्स 140 साल पुराना है, जिससे निकली पाइपलाइनें अपनी मियाद पूरी कर चुकी हैं। कृष्णा कॉलोनी, जीवनीमंडी, आस्था सिटी के पीछे से निकल रहीं पाइपलाइनें बार-बार लीक होती हैं। जलकल विभाग इन लाइनों की मरम्मत वेल्डिंग, लेड भरने की जगह रस्सी फंसाकर कर रहा है। 

रस्सी के निकलने पर फिर से लीकेज की शिकायतें मिलती हैं। जलकल महाप्रबंधक आरएस यादव ने बताया कि जलनिगम ने 100 साल पुरानी जर्जर पाइपलाइनों को बदलने के लिए 1400 करोड़ रुपये की योजना बनाकर शासन को इसी माह भेजी है।

34 कॉलोनियों में लाइनें बिछीं, पर पानी नहीं

गंगाजल योजना के तहत शहर की 34 कॉलोनियों में पानी के वितरण के लिए पाइपलाइनें बिछाई गईं, पर उनमें पानी नहीं आता। ये लाइनें तीन साल से सूखी पड़ी हैं। ओवरहेड टैंक और पंपिंग स्टेशनों से जुड़ी न होने के कारण पानी नहीं पहुच रहा। 

पूरे साल इन 34 कॉलोनियों के लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए, पर पानी फिर भी न आया। इस मामले में प्रदर्शन करने वाले सौरभ चौधरी ने बताया कि मार्च तक पानी देने का दावा अधिकारियों ने किया था, पर अभी तक पाइपलाइन ही नहीं बिछी, इस कारण पानी का संकट बना हुआ है। मार्च क्या, मई की भीषण गर्मी तक भी पानी मिलना मुश्किल है।

बार-बार लीकेज से मुसीबत

पार्षद कन्हैयालाल कुशवाह ने बताया कि मेरे वार्ड में पानी की लाइन ही नहीं थी। अब बिछाई जा रही है। सबमर्सिबल पंप से भूगर्भ जल पर लोग निर्भर हैं। कुछ जगह लाइन हैं पर बार-बार लीकेज की दिक्कतें हैं। एक बार लीकेज, यानी एक दिन पानी का संकट झेलना होता है। 
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भूगर्भ जल पीने लायक नहीं

गोकुलपुरा के धीरेंद्र यादव ने बताया कि पानी की लाइन है, नल लगा है, पर प्रेशर ही नहीं तो क्या फायदा। थककर सबमर्सिबल पंप लगवाना पड़ा लेकिन उसका पानी भी इतना खारा है कि केवल नहाने, कपड़े धोने लायक है। पीने के लिए कैंपर खरीदना पड़ता है। 

दो साल से बिछ रहीं पाइपलाइन

ताजगंज के कमल सिंह ने कहा कि दो साल से पानी की लाइन बिछ रही है, पर काम पूरा नहीं हो पाया। पुरानी लाइनें बिछी थीं जो बार बार खोदाई में टूट गई। पांच साल से पानी नहीं आ रहा। टीटीएसपी टंकी पर जाकर पानी भरते हैं। पता नहीं, घर में लगे नल में पानी कब आएगा। 

प्रबंधन की कमी

जलाधिकार फाउंडेशन के राजीव सक्सेना ने कहा कि आगरा में कमी पानी की नहीं, बल्कि प्रबंधन की है। यमुना, चंबल, कीठम समेत पानी के स्रोत है और गंगाजल भी। केवल बेहतर प्रबंधन से हर घर को पानी पहुंचाया जा सकता है। पुरानी लाइनें बदलकर नई लाइनें बिछाएं और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य किया जाए।

इस साल 80 हजार और घरों तक पहुंचेगा गंगाजल

जलकल विभाग के महाप्रबंधक आरएस यादव ने बताया कि अमृत योजना में जलनिगम तीन साल से नई टंकियां बनवा रहा है और पाइपलाइन बिछा रहा है। उम्मीद है कि इसी साल ताजगंज, शाहगंज, बोदला, आवास विकास क्षेत्र में 80 हजार घरों तक गंगाजल पहुंचने लगेगा। गंगाजल भरपूर है, पर नेटवर्क नहीं था, अब वह तैयार हो रहा है। यमुनापार नया वाटरवर्क्स बनाने और पुरानी लाइनें बदलने का प्रोजेक्ट तैयार कर शासन भेजा गया है। 
 
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