शहर के अमरपुरा, केके नगर, कमला नगर, तोरा, बल्केश्वर, बोदला, सिकंदरा, दौरेठा, आवास विकास कॉलोनी, दयालबाग, शाहगंज आदि क्षेत्रों में भी भूगर्भ जलस्तर में एक से तीन मीटर की गिरावट दर्ज की गई है।
आगरा के आंकड़े
3.20 लाख घर हैं शहर में
350 एमएलडी मिल रहा गंगाजल
260 एमएलडी की है इस समय जरूरत
2031 तक पूरे शहर की जरूरत हो सकती है पूरी
10 लाख लोग भूगर्भ जल पर निर्भर
300 लीकेज हो रहे हर महीने
3400 से ज्यादा लीकेज में बर्बाद हुआ पानी
ताजनगरी में जिन जगहों पर पाइपलाइन हैं, उन इलाकों के लोगों को भी पानी के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। दरअसल, पाइपलाइनों में इस एक साल में 3400 से ज्यादा लीकेज हुए हैं। औसतन 10 से 12 लीकेज की मरम्मत हर दिन की जाती है। सबसे ज्यादा लीकेज जीवनीमंडी वाटरवर्क्स के हैं, जहां दिसंबर से मार्च के तीन माह में पांच बार 28 इंच की लाइन की मरम्मत करनी पड़ी और इसके लिए 10 दिन जलापूर्ति ठप रही।
इसके अलावा बालूगंज में जलनिगम की खोदाई में तीन बार 18 इंच की लाइन तोड़ दी गई तो छीपीटोला, आवास विकास, सिकंदरा, बोदला रोड और आगरा किला के पास पाइपलाइन टूटने से 15 दिन तक जलापूर्ति पर असर पड़ा।
जीवनीमंडी में लाइनें सबसे जर्जर
जीवनीमंडी वाटरवर्क्स 140 साल पुराना है, जिससे निकली पाइपलाइनें अपनी मियाद पूरी कर चुकी हैं। कृष्णा कॉलोनी, जीवनीमंडी, आस्था सिटी के पीछे से निकल रहीं पाइपलाइनें बार-बार लीक होती हैं। जलकल विभाग इन लाइनों की मरम्मत वेल्डिंग, लेड भरने की जगह रस्सी फंसाकर कर रहा है।
रस्सी के निकलने पर फिर से लीकेज की शिकायतें मिलती हैं। जलकल महाप्रबंधक आरएस यादव ने बताया कि जलनिगम ने 100 साल पुरानी जर्जर पाइपलाइनों को बदलने के लिए 1400 करोड़ रुपये की योजना बनाकर शासन को इसी माह भेजी है।