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विश्व प्रकृति दिवस: 10 साल में ताजनगरी की 9 वर्ग किमी हरियाली खत्म, पाताल में पहुंचा जलस्तर

Sun, 04 Oct 2020 11:47 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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आगरा शहर - फोटो : अमर उजाला
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आज विश्व प्रकृति दिवस है। यह दिन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति को सहेजने का संकल्प लेने का है, लेकिन ताजनगरी में प्रकृति के साथ एक दशक से लगातार खिलवाड़ हो रहा है। धरती का शृंगार हरियाली खत्म की जा रही है तो भूगर्भ से इतना पानी खींचा गया है कि अब पाताल तक पानी पहुंच गया है। प्रकृति को सहेजने की जगह नौ किमी का जंगल साफ कर दिया गया और 90 फीट से ज्यादा पानी इन 10 वर्षों में नीचे उतर गया।

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9.38 वर्ग किमी हरियाली हो गई कम
आगरा समेत ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) में एक पेड़ काटने के लिए भी सुप्रीम कोर्ट की अनुमति चाहिए लेकिन इतनी सख्ती के बाद भी ताजनगरी का हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) घट गया। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 में आगरा का हरित क्षेत्र 9.38 वर्ग किमी घट गया। वर्ष 2017 की रिपोर्ट में हरित क्षेत्र 272 वर्ग किमी था, जो 2019 में घटकर 262.62 वर्ग किमी रह गया। खुले जंगल में 9.06 वर्ग किमी और मध्यम घनत्व वाले जंगल में 0.32 वर्ग किमी की कमी पाई गई। 

1.25 लाख पेड़ काटे गए
एक दशक में आगरा में वन क्षेत्र 6.85 फीसदी से घटकर 6.69 फीसदी रह गया है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे, इनर रिंग रोड, माल रोड, नेशनल हाईवे, रेलवे, बिजली परियोजनाओं के लिए एक दशक में दनादन पेड़ काटे गए हैं। 1.25 लाख पेड़ों पर विभिन्न योजनाओं और प्रोजेक्ट में आरी चलाई जा चुकी है।
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साल     हरित क्षेत्र    किमी
2011    6.85%     276
2013    6.78%     273
2015    6.75%     273
2017    6.73%     272
2019    6.69%     262.6
 

90 फीट नीचे चला गया जलस्तर
10 साल के अंदर आगरा का भूगर्भ जल स्तर 90 फीट से ज्यादा नीचे चला गया है। शहर की 55 फीसदी आबादी भूगर्भ जलस्तर पर निर्भर है। शहर में केवल 45 फीसदी हिस्से पर ही पानी की पाइपलाइन है जिसमें जीवनी मंडी और सिकंदरा वाटरवर्क्स से पानी की सप्लाई होती है। बाकी शहर और देहात के लोग पेयजल के लिए भूगर्भ जल पर निर्भर हैं। साल 2010 में सिकंदरा क्षेत्र में जलस्तर 105 फीट पर था, लेकिन अब 195 फीट पर पानी मिल रहा है। कमला नगर में 130 की जगह 220 फीट पर पानी है। शाहगंज में बेलनगंज की ओर 90 की जगह 180 फीट पर पानी है। 

सिकंदरा क्षेत्र
साल 2010 : जलस्तर 105 फीट नीचे
साल 2020 : जलस्तर 195 फीट नीचे

कमला नगर क्षेत्र
साल 2010 : जलस्तर 130 फीट नीचे
साल 2020: जलस्तर 220 फीट नीचे

शाहगंज में बेलनगंज की ओर
साल 2010 : जलस्तर 90 फीट नीचे
साल 2020: जलस्तर 180 फीट नीचे
 
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अलार्म बजा चुकी प्रकृति, अब भी चेत जाएं
टीटीजेड अथॉरिटी के सदस्य उमेश शर्मा का कहना है कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ महंगा पड़ेगा। बार-बार प्रकृति अलार्म बजाकर चेतावनी दे रही है। अब भी समय है। हमें अपनी नदियों और पेड़ों को बचाना होगा। हर घर को पांच पेड़ लगाने की मुहिम में जुटना पड़ेगा।

जलाधिकार फाउंडेशन के राजीव सक्सेना ने बताया कि चाहे पौधरोपण हो या भूगर्भ जल को बचाने की मुहिम, सभी में सरकार की तरफ देखने की जगह लोगों को जागरूक होना पड़ेगा। जो काम समाज कर सकता है, सरकार नहीं कर सकती। आगरा के जंगलों से बबूल हटाकर देशी प्रजाति के पौधे लगाने की जरूरत है।
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