आगरा में पांच साल पहले 1705 नमूनों की जांच में एक में मलेरिया मिलता था, अब 19666 लोगों की जांच में मलेरिया का एक मरीज मिला है। बीमारी देने वाली मादा एनाफिलीज का गणित समझ में आते ही जागरूकता बरती और मलेरिया के मामले भी घटने लगे। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि 2018 में 1705 नमूनों की जांच करने पर एक में मलेरिया की पुष्टि हो रही थी। इसी साल संचारी रोग अभियान शुरू हुआ। इसका असर भी दिखा और 2019 में 2110 नमूनों की जांच में एक, 2020 में 2735 नमूनों की जांच में एक और 2021 में 3219 नमूनों की जांच में मलेरिया का एक मरीज मिला है। इस साल 19666 नमूने लिए गए हैं, जिसमें से एक में मलेरिया की पुष्टि हुई है। इन पांच साल में मलेरिया से एक भी मरीज की मौत नहीं हुई।
संचारी रोग अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. राकेश कुमार अग्निहोत्री ने बताया कि मलेरिया संक्रमित मादा एनाफिलीज के काटने से होता है। ये मच्छर साफ और ठहरे 20 मिलीलीटर में पनप जाता है। इसकी उम्र छह से आठ सप्ताह है। केंद्र सरकार ने 2030 तक मलेरिया के खात्मे का लक्ष्य रखा है, इसको पूरा करने का अभियान सफल साबित हो रहा है।
- संचारी रोग : 2018 में संचारी रोग अभियान शुरू हुआ। 30 दिन तक गांव-शहर में साफ-सफाई जलभराव न होने, स्कूलों में बच्चों को बीमारी की जानकारी देने के लिए अभियान में 12 विभाग शामिल होते हैं।
- तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द होना
- रात को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनकर सोएं, मच्छरदानी लगाएं
- मच्छररोधी क्रीम लगाएं, सोने से घंटेभर पहले कॉइल जलाएं
- ठहरे हुए पानी और नाली में केरोसिन की बूंदें छिड़क दें
- खिड़कियों और दरवाजों पर जाली लगाएं, जिससे मच्छर न आ पाए
- पानी को ढककर रखें, ड्रम-टंकी की सफाई करें
(जैसा कि जिला मलेरिया अधिकारी नीरज कुमार ने बताया)
साल मरीज नमूने लिए
2022 01 19666
2021 31 99790
2020 25 68376
2019 81 170910
2018 86 146630