मैनपुरी। दहेज हत्या के आरोप में जेल में बंद एक महिला को समय से पहले जेल से रिहा किया जाएगा। महिला के प्रार्थनापत्र पर एसपी की ओर से की गई जांच के बाद डीएम ने संस्तुति करते हुए महानिरीक्षक कारागार एवं प्रशासन लखनऊ को पत्र भेजा है।
थाना बरनाहल के गंाव दिहुली निवासी हसीना बेगम पत्नी निजाम खां के खिलाफ वर्ष 2016 में दहेज हत्या की रिपोर्ट लिखाई गई थी। पुलिस की ओर से भेजी गई चार्जशीट के बाद मुकदमे की सुनवाई एफटीसी जज शक्ति सिंह की कोर्ट में की गई। एफटीसी जज ने 27 सितंबर 2019 को हसीना बेगम को दहेज हत्या का दोषी पाकर 10 साल की सजा सुनाई है। हसीना बेगम जेल में बंद चल रही हैं।
हसीना बेगम ने समय से पूर्व जेल से रिहा करने के संबंध में दिए गए प्रार्थनापत्र पर एसपी ने जांच की। एसपी की जांच के बाद जिला प्रोबेशन अधिकारी की टिप्पणी के बाद डीएम महेंद्र बहादुर ने हसीना बेगम को समय से पूर्व जेल से रिहा करने की संस्तुति करते हुए महानिरीक्षक कारागार एवं प्रशासन लखनऊ को पत्र भेजा है।
जेल में बिता चुकी पंाच साल
हसीना बेगम को पुलिस ने जेल भेज दिया था। उनको 27 सितंबर 2019 को सजा सुनाई गई। जेल अभिलेखों के अनुसार हसीना बेगम जेल में पंाच साल तीन महीने आठ दिन की सजा भुगत चुकी हैं।
यह था मामला
जिला फिरोजाबाद के थाना सिरसागंज के सराय शेख निवासी लवली की शादी जून 2015 में यूनुस निवासी दिहुली थाना बरनाहल के साथ हुई थी। शादी के बाद दहेज में बाइक और सोने की अंगूठी की मांग को लेकर ससुराल के लोगों ने उसको जला दिया। 28 जनवरी 2016 को उपचार के दौरान लवली की मौत हो गई। उसके भाई फिरोज अली ने पति यूनुस, ससुर निजाम, सास हसीना बेगम के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। एडीजीसी अनूप यादव, मुकुल रायजादा की दलीलों पर एफटीसी जज शक्ति सिंह ने सास और पति को 10-10 साल की सजा सुनाकर उन पर सात-सात हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
मृत्यु पूर्व बयान से हुई थी सजा
उपचार के दौरान लवली के मजिस्ट्रेट ने बयान दर्ज किए। उसने बयानों में पति और सास पर दहेज की खातिर जलाने का आरोप लगाया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान मृत्यु पूर्व बयानों के आधार पर सास और पति को सजा सुनाई गई। ससुर निजाम के खिलाफ गवाही नहीं होने पर उसको दहेज हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया था।