कमेटी के अध्यक्ष सुलखान सिंह ने गोस्वामी समाज की महिलाओं से जहां हादसे के कारणों को जानने का प्रयास किया। श्रद्धालुओं के लिए बेहतर इंतजाम के लिए सुझाव लिए। सरोज गोस्वामी ने पूर्व डीजीपी को बताया कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि हमें भी मंदिर में आने से रोका जा रहा है, पुलिसकर्मी हमें धक्का देकर लौटा देते हैं। जबकि वीआईपी को बड़ी इज्जत के साथ दर्शन कराए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि गेट नंबर एक और चार से हमें प्रवेश देने के आदेश दिए जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन की हठधर्मिता के कारण गलियों में बैरिकेडिंग लगा दीं गईं हैं। बच्चों के स्कूल आने जाने पर भी पाबंदी लगा दी गई है। हम अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं। पूर्व डीजीपी ने महिलाओं की समस्याओं को सुनकर समाधान का आश्वासन दिया।
गोस्वामी बोले, हमें ठाकुरजी से दूर न किया जाए
कमेटी के अध्यक्ष और सदस्य ने मंदिर के सेवायत गोस्वामियों से वार्ता की। गोस्वामियों ने कहा कि अगर हमें हमारे आराध्य ठाकुर बांकेबिहारी से दूर करने का प्रयास किया गया तो ऐसा न हो कि हम मंदिर के पट बंद कर विरोध पर उतर आएं। मंदिर के विकास के लिए हम प्रशासन के साथ हैं लेकिन मर्यादाओं के साथ खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पुलिस हमारे साथ ऐसा सलूक कर रही है, जैसे इस हादसे के लिए हम दोषी हैं। जो अधिकारी इसके लिए दोषी हैं उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस मौके पर गोपेश गोस्वामी, दिनेश गोस्वामी, रजत गोस्वामी, बालकिशन गोस्वामी, प्रणव गोस्वामी, ब्रजेंद्र गोस्वामी, देवेंद्र नाथ गोस्वामी, हिमांशु गोस्वामी, विशाल गोस्वामी,ज्ञानेंद्र गोस्वामी, आशीष गोस्वामी के अलावा मंदिर प्रबंधक मुनीष शर्मा और उमेश सारस्वत भी थे।
अधिकारियों पर लगे वीडियो बनाने के आरोप
जांच कमेटी के अध्यक्ष के सामने गोस्वामी समाज की महिलाओं ने प्रशासन व पुलिस अधिकारियों द्वारा मंदिर की ऊपरी मंजिल से फोटो लेने और वीडियो बनाने का आरोप लगाया। सरोज गोस्वामी ने आरोप लगाया कि मंदिर में बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है कि ठाकुरजी का फोटो और वीडियो लेना अपराध है, इसके बाद भी अधिकारियों ने फोटो लीं और वीडियो बनाया। आखिर इन अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।
जांच समित के अध्यक्ष पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने कहा कि गोस्वामी समाज की बहुओं और सेवायतों से वार्ता की है। उनकी बताई समस्याओं के बारे में जिले के अधिकारियों से वार्ता करने के बाद जो भी तथ्य हमें सही लगेंगे, उन्हें अपनी रिपोर्ट में देंगे।