गाड़ी चलाने में आगे हैं महिलाएं, लाइसेंस बनवाने में फिसड्डी
- बीते छह माह में पुरुषों के मुकाबले केवल दस फीसदी महिलाओं ने बनवाए डीएल
15 लाख से ज्यादा ड्राइविंग लाइसेंस पंजीकृत हैं आरटीओ में
10 फीसदी भी नहीं है महिलाओं की संख्या
11,92,682 वाहन पंजीकृत हैं आरटीओ में
03 लाख वाहन हैं महिलाओं के नाम
1 अप्रैल 20 से 31 मार्च 21 तक वाहनों का पंजीकरण
पुरुष : करीब 44 हजार
महिलाएं : करीब 10 हजार
1 अप्रैल 2021 से 30 सितंबर तक बनवाए गए लाइसेंस
पुरुष : 28,682
महिलाएं : 3,048
अमर उजाला ब्यूरो
आगरा। ताजनगरी की सड़कों पर महिलाएं कार और दोपहिया पर फर्राटा भरती खूब दिखाई दे जाएंगी लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में बहुत पीछे हैं। हर साल पंजीकृत होने वाली लगभग 25 फीसदी गाड़ियां महिलाओं के नाम दर्ज हैं, लेकिन पिछले छह माह में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने वाली महिलाओं की संख्या 10 फीसदी ही है।
हर साल करीब 60 से 65 हजार ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जाते हैं। इनमें भारी वाहनों के ड्राइविंग लाइसेंस शामिल नहीं हैं। ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में ताजनगरी की महिलाएं पुरुषों के मुकाबले बहुत पीछे हैं। कोरोना काल के छह महीनों में प्रतिदिन बनाए गए औसत 180 लाइसेंस में से महज 18 ही महिलाओं के होते हैं।
आरटीओ के रिकॉर्ड के मुताबिक, जिले में 25 फीसदी वाहन हर साल महिलाओं के नाम से पंजीकृत होते हैं। दोपहिया वाहन, कारें, यहां तक व्यावसायिक वाहन भी महिलाओं के नाम दर्ज हैं।
पांच हजार का है जुर्माना
आरटीओ के मुताबिक बगैर लाइसेंस के वाहन चलाने पर अधिकतम पांच हजार रुपये का जुर्माना है। यदि चालक के पास डीएल नहीं है तो दुर्घटना होने की स्थिति में बीमा क्लेम नहीं मिलता।
छात्राएं-कामकाजी महिलाएं बनवाती हैं
गाड़ी भले ही महिलाओं के नाम पंजीकृत हों लेकिन उनके लाइसेंस की संख्या कम है। छात्राएं और कामकाजी महिलाएं ही लाइसेंस बनवाने पर ध्यान देती हैं। इसके लिए अभिभावकों की सोच भी जिम्मेदार है। जागरूकता लाने की जरूरत है। -देवदत्त शर्मा, संभागीय निरीक्षक (प्राविधिक), आरटीओ