घर में मामूली झगड़े के बाद एक महिला ने आत्महत्या करने के लिए ईदगाह स्टेशन पर ट्रेन के आगे लेट गई। प्लेटफार्म पर अपने तीन बच्चों को रोता छोड़ दिया। यह देखकर स्टेशन पर मौजूद सिपाही उसे बचाने दौड़े। महिला को ट्रैक से हटाकर उसकी जान बचाई। इसके बाद उसे चौकी पर ले जाकर समझाया।
हाथरस के गांव मनीपुर निवासी सुनीता की शादी 15 साल पहले कोटली बगीची (ताजगंज) निवासी रमेश के साथ हुई थी। सुनीता की बहन सरोज की शादी भी उसके देवर हरी सिंह से हुई है। दोनों बहनें एक ही घर में रहती हैं। तीन दिन पहले सुनीता की मां रामवती आईं थी। सुनीता ने बताया कि उसकी जेठानी मिथलेश की बेटी की शादी है। रविवार को मिथलेश अपने मायके जा रही थी। वह भी उसके साथ जाना चाहती थी, लेकिन सरोज ने इंकार कर दिया। जब सुनीता जाने लगी तो रामवती भी उसे रोकने लगी। इस पर मां-बेटी में झगड़ा हो गया। सुनीता ने अपने सिर में ईंट मारकर खुद को लहूलुहान कर लिया। वह बेहोश हो गई। कुछ देर बाद होश में आने पर सुनीता छोटी बहन के घर जाने की कहकर अपने तीन बच्चों जितेंद्र (13), मदन (8) और संजना (4) को लेकर घर से निकल पड़ी।
दोपहर तकरीबन 12:30 बजे ईदगाह स्टेशन पर पहुंची। एक बजे प्लेटफार्म एक पर तूफान एक्सप्रेस आने लगी। तभी सुनीता ट्रैक पर जाकर लेट गई। ट्रेन तकरीबन 150 मीटर दूर देख बच्चे रोने लगे। इस पर जीआरपी के सिपाही सुरेंद्र सिंह और सिपाही इंकी मिश्रा बचाने दौड़ी। सुनीता को दूसरे ट्रैक पर खींच लिया। सूचना पर उसका पति भी पहुंच गया। बाद में घर लेकर चला गया।
मां से लिपटकर रोये बच्चे
रमेश और सुनीता मजदूरी करते हैं। उनके पांच बच्चे हैं। बड़ा बेटा जितेंद्र समझदार है। सुनीता ने गुस्से में आत्मघाती कदम तो उठा लिया, लेकिन बच्चों को बिलखता देख पछतावा भी होने लगा। बच्चों से लिपटकर वह भी रोने लगी। इस पर जितेंद्र ने मां के आंसू पोंछे।