आगरा के मंदिरों में सर्दी की शुरुआत के साथ भगवान के पहनावे, भोग और पूजा की दिनचर्या में बदलाव शुरू हो गया है। मनकामेश्वर मंदिर में बाबा को गर्म पोशाक ओढ़ाई जा रही है और भोग में मिल्क केक अर्पित किया जा रहा है।
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सर्दी की दस्तक के साथ ही शहर के मंदिरों में भगवान की सेवा, शृंगार और पूजा की दिनचर्या में बदलाव शुरू हो गया है। रावतपाड़ा स्थित मन:कामेश्वर महादेव मंदिर में नवरात्र के बाद से ही बाबा मन:कामेश्वर नाथ को गर्म पोशाक ओढ़ाना शुरू कर दिया गया है।
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मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि इत्र और भोग में भी मौसम के अनुरूप बदलाव किया गया है। खस की जगह हिना के इत्र का इस्तेमाल हो रहा है और भोग में मिल्क केक अर्पित किया जा रहा है। दिवाली के बाद बाबा को कंबल भी ओढ़ाया जाएगा। नवरात्र से ही बाबा मनकामेश्वर नाथ की शीतकालीन सेवा शुरू कर दी गई है।
पुष्टिमार्गीय प्राचीन मथुराधीश मंदिर के सेवायत जुगल किशोर श्रोत्रिय ने बताया कि देवउठनी एकादशी से ठाकुरजी की शीतकालीन सेवा शुरू होगी। उन्हें ऊनी पोशाक धारण कराई जाएगी और भोग में मेवे के लड्डू, पंच मेवा का भोग व अधोटा दूध अर्पित किए जाएंगे। सर्दी के अनुसार पूजा-पाठ और सेवा की समय-सारणी भी बदली जाएगी।
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पुष्टिमार्गीय प्रेम निधि मंदिर के सेवायत सुनीत गोस्वामी ने बताया कि एकादशी से ठाकुरजी की दिनचर्या में बदलाव होगा। सुबह छह बजे होने वाली पूजा अब सात बजे होगी। रात का शयन साढ़े नौ बजे के बजाय रात नौ बजे कराया जाएगा। दोपहर में पट बंद होने का समय भी सुबह 11 बजे से बढ़ाकर 12 बजे किया जाएगा। मौसम के अनुसार ठाकुरजी के वस्त्र और भोग की व्यवस्था होगी।
कैलाश महादेव मंदिर के पुजारी महेंद्र गौरव गिरि ने बताया कि दिवाली के बाद मंदिर में पूजा-पाठ की दिनचर्या बदल जाएगी। सर्दी के मौसम को देखते हुए नियमित पूजा और दर्शन के समय में परिवर्तन किया जाएगा। मंदिरों में ऋतु परिवर्तन के साथ भगवान के पहनावे, खानपान और सेवा के समय में बदलाव की परंपरा है।