हरेंद्री देवी ने कहा कि यदि मामले में दोषी कर्मचारियों को बर्खास्त और गिरफ्तार नहीं किया गया तो वह रेलवे ट्रैक पर जाकर अपनी जान दे देंगी। यह कहते-कहते वह भावुक होकर फूट-फूटकर रोने लगीं। उनके आंसू देखकर मौके पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारी भी भावुक हो गए।
डीआरएम मुर्दाबाद के लगाए गए नारे
इस दौरान प्रदर्शनकारियों में आक्रोश बढ़ गया और उन्होंने डीआरएम मुर्दाबाद, नहीं चलेगी, नहीं चलेगी तथा डीआरएम आगरा छोड़ो के नारे लगाए। कुछ देर के लिए प्रदर्शन स्थल का माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया।
हरेंद्री देवी के साथ गांव से आईं ममता चाहर और भगवान देवी ने उन्हें संभालने और शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन वह लगातार रोती रहीं। प्रदर्शन में मौजूद कई कर्मचारियों ने उन्हें ढांढस बंधाया।
ऑल इंडिया स्टेशन मास्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने दोहराया कि वे मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी और सेवा समाप्ति कार्रवाई से कम पर समझौता नहीं करेंगे।
डीएसएस नरेंद्र चाहर से मिला जाट महासभा का प्रतिनिधिमंडल
कैंट रेलवे स्टेशन पर डीएसएस नरेंद्र चाहर से अखिल भारतीय जाट महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात कर हालिया मारपीट की घटना की जानकारी ली। प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ भाजपा किसान नेता मोहन सिंह चाहर, जाट महासभा के जिलाध्यक्ष कप्तान सिंह चाहर, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष निर्मल चाहर और महानगर अध्यक्ष गजेंद्र सिंह शामिल रहे।
नेताओं ने कैंट स्टेशन पर आरपीएफ कर्मियों ने नरेंद्र चाहर को घसीटकर पीटने की घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे वर्दी की खुली गुंडागर्दी बताया। उन्होंने कहा कि दोषी आरपीएफ कर्मियों को केवल निलंबित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाए तथा उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विभागीय कार्रवाई की जाए।
मोहन सिंह चाहर और कप्तान सिंह चाहर ने कहा कि नरेंद्र चाहर ने ट्रेन छूट रही एक महिला यात्री की मानवता के नाते मदद की थी। मदद करना अपराध नहीं, बल्कि सराहनीय कार्य है। उनका कहना था कि ऐसे अधिकारी को सम्मानित किया जाना चाहिए था, लेकिन उसके साथ मारपीट की गई। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए समान है और वर्दी का उद्देश्य जनता की सुरक्षा है, न कि कानून हाथ में लेकर अपराध करना।