दहेज के लिए विवाहिता की हत्या करने के दोषी पति, सास-ससुर और जेठ को कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी देना होगा।
मैनपुरी में दहेज का मांग पूरी नहीं होने पर महिला की जिंदा जलाकर हत्या करने वाले पति, सास, ससुर और जेठ को अपर जिला जज षष्ठम चेतना चौहान ने 10-10 साल की सजा सुनाई है। उन पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा सुनाने के बाद सभी को अदालत से ही हिरासत में लेकर जेल भेजा गया है।
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जिला फिरोजाबाद के थाना रामगढ़ के हसमतनगर की रहने वाली मुस्तकीम ने अपनी पुत्री आयशा बानो की शादी 20 अक्तूबर 2013 को मोहम्मद बारिस निवासी बरनाहल के साथ की थी। शादी के बाद दहेज में बाइक और 50 हजार रुपये की मांग को लेकर आयशा का ससुराल के लोगों ने उत्पीड़न किया। दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर 17 फरवरी 2016 को उसकी जलाकर हत्या कर दी। मुस्तकीम ने पति मोहम्मद बारिस, ससुर लियाकत अली, सास शहजादी बेगम, जेठ कुर्बान अली के खिलाफ थाना बरनाहल में 18 फरवरी 2016 को रिपोर्ट दर्ज करा दी।
पुलिस ने जांच करने के बाद पति, सास, ससुर, जेठ के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में भेज दी। एडीजीसी मुकुल रायजादा ने वादी, विवेचक, चिकित्सक सहित गवाहों की गवाही कराई। गवाही के आधार पर चारों को आयशा बानो की जलाकर हत्या करने का दोषी पाया गया। अपर जिला जज षष्टम चेतना चौहान ने पति, सास, ससुर, जेठ को 10-10 साल की सजा सुनाई है। उन पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
मुकदमे में किया था समझौता
दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर शादी के कुछ समय बाद गर्भवती होने पर पति मोहम्मद साबिर सहित ससुराल के लोगों ने आयशा बानो को घर से निकाल दिया था। आयशा ने फिरोजाबाद की अदालत में पति सहित ससुराल के लोगों के खिलाफ भरण पोषण पाने तथा दहेज उत्पीड़न करने का मुकदमा दायर किया। इन मुकदमों में अदालत में लिखित समझौता करके ससुराल के ससुराल के लोग आयशा को घर ले गए। दो महीने बाद ही उसकी जलाकर हत्या कर दी।