आगरा में बृहस्पतिवार शाम मौसम ने अचानक करवट बदली। दिनभर तेज धूप के बाद शाम को 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं और हल्की बूंदाबांदी ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। तेज हवाओं के चलते तापमान में खासी गिरावट दर्ज की गई। इससे लोगों को गर्मी से फौरी राहत तो मिली, लेकिन किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई। मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए आंधी और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
बृहस्पतिवार को आगरा का अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 19.1 डिग्री सेल्सियस रहा। शाम होते ही आसमान में काली घटाएं छा गईं और तूफानी हवाओं के साथ शुरू हुई बूंदाबांदी ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। धूल भरी आंधी के कारण शहर के कई हिस्सों में विजिबिलिटी कम हो गई और दुपहिया वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ओले गिरते हैं, तो खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
आंधी-बारिश से सहमे किसान
जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में बृहस्पतिवार देर शाम आंधी के साथ बारिश हुई। इस बदले मौसम से किसानों की चिंता बढ़ गई है। रबी और जायद दोनों फसलों पर इसका प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि तेज आंधी से गेहूं की फसल गिर सकती है। इससे गेहूं की पैदावार में कमी आने की संभावना है। सरसों की फसल इस समय पकने की स्थिति में है। बारिश के कारण पका हुआ दाना बाली में ही दोबारा अंकुरित हो सकता है। इससे सरसों की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों प्रभावित होंगे। आलू की खुदाई के बाद खेत में पड़े रहने पर बारिश से उसमें फफूंदी लगने का खतरा है। इससे आलू खराब हो सकता है और किसानों को आर्थिक नुकसान होगा।
मूंग की बुवाई पर असर
लगातार नमी रहने से मूंग की बुवाई में लगभग एक सप्ताह की देरी हो सकती है। यह देरी फसल चक्र को भी प्रभावित करेगी। किसानों को इस अप्रत्याशित मौसम से भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने किसानों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
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