मैनपुरी। पीने योग्य जल का पृथ्वी पर सीमित भंडार है। मैनपुरी के लोग भूगर्भ जल को सहे नहीं पा रहे हैं। बीते दो दशकों में तेजी के साथ जल स्तर नीचे गिरा है। आंकड़ें इस बात की सच्चाई बयां कर रहे हैं। इसे सुधारने के लिए भी प्रयास नहीं किए जा रहे।
जल निगम के आंकड़ों के अनुसार दो दशक पहले तक जिले के कई क्षेत्रों में 30 फीट तक भूगर्भ जल उपलब्ध था। साल दर साल पानी के अत्यधिक दोहन के चलते जल स्तर गिरता चला गया। सबसे अधिक जल स्तर मैनपुरी और बरनाहल ब्लॉक में गिरा। इसके चलते वर्ष 2004 में दोनों ब्लॉकों को डार्कजोन में शामिल कर दिया गया।
मैनपुरी तो तीन सालों में ही इससे बाहर आ गया, लेकिन बरनाहल को डार्क जोन से बाहर आने में 13 साल का समय लग गया। वर्तमान में आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो भूगर्भ जल स्तर जिले में तेजी के साथ गिर रहा है। इस पर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। सबसे अधिक पानी का दोहन सबमर्सिबलों से हो रहा है। खुलेआम इनसे पानी बहाया जा रहा है, लेकिन कोई कुछ कहने वाला नहीं है।
जल संरक्षण की मुहिम न हो सकी सफल
केंद्र सरकार के आदेश पर जिले में जल संरक्षण की मुहिम चलाई गई थी। इसमें जिले के ब्लॉक बरनाहल पर विशेष जोर दिया गया था। ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में कई बार सरकारी हैंडपंपों में लगे सबमर्सिबल निकालने के आदेश दिए गए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। तालाबों की कायाकल्प का आदेश भी रंग ला सका।
तहसीलवार भूगर्भ जल का स्तर
तहसील वर्ष 2000 में स्तर (फीट में) वर्तमान जल स्तर
मैनपुरी 30-50 90-110
भोगांव 25-40 50-70
किशनी 30-50 60-80
करहल 60-80 90-120
कुरावली 30-45 50-70
घिरोर 50-70 100-120
सभी विभाग प्रयास कर रहे
जल संरक्षण के लिए सभी विभाग प्रयास कर रहे हैं। बरनाहल में पहले की अपेक्षा सुधार हुआ भी है। लेकिन सभी ब्लॉकों में अब जल संरक्षण की आवश्यकता है। लोगों को इस बात को समझते हुए पानी की बरबादी नहीं करनी चाहिए।
राजकुमार शर्मा, अधिशासी अभियंता जल निगम।