आगरा के यमुनापार में पानी का संकट देखते हुए 100 एमएलडी का नया वाटरवर्क्स बनाने की योजना बनाई गई है, जिसकी पीएफआर (प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट) बनाकर जल निगम ने नगर निगम को सौंप दी है। 100 एमबीबीआर के प्लांट के साथ वितरण नेटवर्क को तैयार करने पर 650 करोड़ रुपये की लागत आएगी। नगर निगम ने इसके लिए जमीन भी चिह्नित कर ली है। इस मामले में अगले सप्ताह लखनऊ में नगर विकास विभाग में
महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है, वहीं मेयर नवीन जैन ने कहा कि पेयजल संकट की योजना के मसले पर नगर विकास मंत्री और मुख्यमंत्री से मिलकर पैरवी करेंगे।
जलनिगम की निर्माण इकाई ने यमुनापार पानी के संकट को दूर करने के लिए 100 एमएलडी क्षमता का नया एमबीबीआर प्लांट बनाने की पीएफआर सौंपी है। इसमें कम से कम 3 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी, जिसमें एमबीबीआर प्लांट के साथ रिजर्वायर और पंपिंग स्टेशन बनाया जाएगा।
इसके साथ ही यमुना पार शाहदरा, नरायच, टेढ़ी बगिया, ट्रांसयमुना, नुनिहाई और भविष्य में 30 साल की जरूरतों को देखते हुए ओवरहेड टैंक और रिजर्वायर तैयार कराए जाएंगे। पाइप लाइन नेटवर्क भी बिछाया जाएगा, जिसे पुराने पड़े नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा। फिलहाल शहर में दो वाटरवर्क्स हैं। यमुना पार में बन जाने से तीन वाटर वर्क्स हो जाएंगे।
बजट मिलने के बाद तीन से चार साल लगेंगे बनने में
जलनिगम के प्रोजेक्ट मैनेजर ने बताया कि अगर जमीन उपलब्ध हो जाए और बजट मिल जाए 3 से 4 साल में काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद लोगों को पानी मिलने मिलेगा।
प्रस्ताव बनाकर निगम को दिया
100 एमएलडी क्षमता के एमबीबीआर प्लांट का प्रस्ताव बनाकर हमने नगर निगम को दे दिया है। इसमें वाटरवर्क्स के साथ वितरण के लिए पानी की टंकियां, पाइप लाइन, रिजर्वायर भी बनेंगे। यमुनापार के हर क्षेत्र को जलापूर्ति के लिए वितरण नेटवर्क बनेगा। - महेश गौतम, प्रोजेक्ट मैनेजर, जल निगम, निर्माण इकाई
यमुनापार को बड़ी योजना की जरूरत
यमुनापार के पानी संकट को दूर करने के लिए बड़ी योजना की जरूरत है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पानी की योजना पर काम होगा ताकि 30 साल तक किसी तरह की दिक्कत न आए। वाटरवर्क्स के साथ कई अन्य विकल्पों पर भी काम चल रहा है। - नवीन जैन, मेयर