गिरने का रहता है डर
काजीपाड़ा निवासी मनीष कुमार ने कहा कि नाले की दीवार टूटे सात महीने हो गए, तब तक नाला बना नहीं पाए। बारिश में पानी सड़क पर होकर निकला तो पूरी सड़क टूट गई। अब स्कूटी, मोटरसाइकिल निकालने में ही डर लगता है कि नाले में न गिर जाएं। नाले की मरम्मत में सीमेंट की जगह रेत इस्तेमाल की गई है।
निकलने की जगह भी नहीं
काजीपाड़ा की पार्षद ज्ञानवती ने कहा कि पूरा मानसून बीत गया, पर नाले का निर्माण नहीं हो पाया। लोगों के निकलने की जगह ही नहीं बची। सरिया निकली हुई हैं, यहां न बैरिकेडिंग की गई है, न बचाव का इंतजाम है। पूरा रोड ऊबड़-खाबड़ है। कोई हादसा हो जाएगा जो जवाबदेही किसकी होगी।
मरम्मत के लिए बने योजना
पीपलमंडी के पार्षद रवि बिहारी माथुर ने कहा कि मानसून से पहले जो नाले तेज बहाव में टूट गए हैं, उनकी मरम्मत के लिए यह सही समय है। अभी काम शुरू करेंगे तो अगले साल मानसून से पहले जून तक पूरा कर लेंगे। नालों की मरम्मत के लिए अभी कार्य योजना बननी चाहिए।
मरम्मत के लिए जोन इंजीनियरों से कहा
मेयर नवीन जैन ने कहा कि जिन नालों की दीवारें क्षतिग्रस्त हैं, उनकी मरम्मत के लिए हर जोन में इंजीनियरों से कहा गया है। काजीपाड़ा समेत सभी नालों की मरम्मत के एस्टिमेट बनाएं और उन्हें स्वीकृत कराएं। ठेकेदार अधूरा काम छोड़कर कैसे चले गए, इसके लिए मैने चारों जोन में इंजीनियरों से रिपोर्ट मांगी है।