वृंदावन में आयोजित कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक के पहले शाही स्नान के बाद अखाड़ा परिषद के प्रमुख संतों ने हरिद्वार में लगने वाले महाकुंभ की तैयारियों को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। पहले शाही स्नान में यमुना में शुद्ध जल उपलब्ध न होने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि कोरोना बीमारी से ज्यादा खतरनाक यमुना का जल है। वहीं, उत्तराखंड सरकार से कोरोना के नाम पर संतों की परंपरा और आस्था से छेड़खानी न करने की बात कही।
अखिल भारतीय श्रीपंच निर्मोही अनी अखाड़ा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र दास ने कहा है कि वृंदावन कुंभ बैठक के सभी शाही स्नान और शोभायात्रा के बाद हरिद्वार में कुंभ मेला लगेगा। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सरकार कोरोना के नाम पर संतों की परंपरा, सनातन धर्म और आस्था के साथ छेड़खानी न करे। जैसे माघ मेला और कुंभ बैठक शांति पूर्वक चल रही है, उसी अनुरूप हरिद्वार कुंभ में मेला की व्यवस्थाएं होनी चाहिए।
'यमुना का हाल देख मन दुखी हुआ'
उन्होंने कहा कि वृंदावन कुंभ में वैष्णव समाज और वैष्णव साधु-संतों की भावनाओं को समझते हुए व्यवस्थाएं की गई हैं। लेकिन यमुना के जल को देखकर मन दुखी हुआ है। वर्तमान में कोरोना जैसी बीमारी से ज्यादा यमुना जी का जल खतरनाक है। यमुना में एनसीआर और दिल्ली से प्रदूषित जल आ रहा है।