महामंडलेश्वर नवल गिरि , कार्ष्णि नागेंद्र , आचार्य बद्रीश
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पिछले कई दिनों से टूलकिट विवाद सुर्खियों में बना हुआ। कांग्रेस और भाजपा के नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। दूसरी लहर में कोविड संक्रमण के लिए हिंदुओं के धार्मिक आयोजन और कुंभ को भी बताया गया है। इसे लेकर वृंदावन के संत नाराज हैं। संतों का कहना है कि राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के लिए धर्म को आधार न बनाया जाए।
महामंडलेश्वर नवल गिरि ने कहा कि सनातन धर्म, संस्कृति, पर्व से ही भारत की पहचान है। संयुक्त राष्ट्र ने पिछले वर्षों प्रयागराज कुंभ की तारीफ की थी। यही भारतीय संस्कृति की ताकत है। भारतीय संस्कृति धर्म सब को जोड़ने और सबके हित की बात करता है। आपत्ति आने पर सभी धर्मात्मा साधु-संत, मंडलेश्वर हिन्दुओं ने कुंभ के कार्यक्रमों को एक प्रतीकात्मक रूप देकर के विश्राम किया। इसके बावजूद सनातन धर्म संस्कृति को बदनाम करने की मानसिकता निंदनीय है।
'कोई भी दल धर्म को बदनाम ना करे'
काशी विद्वत परिषद के पश्चिमी भारत प्रभारी कार्ष्णि नागेंद्र ने कहा कि कोई भी दल धर्म को बदनाम ना करें। कोविड पूरे विश्व में है ना कि सिर्फ भारत में इसका प्रभाव देखा जा रहा है। सनातन धर्म ने हमेशा ही बीमारियों को दूर करने के कई उपाय बताए हैं। मनुष्य को खुश रहने के उपाय बताए हैं। सबको साथ रहने के उपाय बताए हैं। सनातन धर्म का एक ही मकसद है कि सारे लोग मिलकर स्वस्थ रहें। कुंभ और होली को लेकर भ्रम ना फैलाएं। धर्म के साथ इस महामारी में राजनीति निंदनीय है।