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वृंदावन में 250 वर्षों से हो रहा कुंभ का आयोजन, विधिवत मान्यता दे सरकार: संत राजेंद्र दास

Wed, 27 Jan 2021 12:02 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
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वृंदावन के संत राजेंद्र दास - फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन में लगने वाला कुंभ किसी राजनीतिक दल की परिकल्पना नहीं, बल्कि विगत 250 वर्षों से भी अधिक समय किए जाने वाला आयोजन है। इसलिए इसकी मान्यता पर संदेह नहीं किया जा सकता। सरकार को चाहिए कि विधिवत घोषणा कर इस आयोजन को कुंभ की मान्यता प्रदान करे। ये बातें स्थानीय वंशीवट स्थित मलूकपीठ में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मलूक पीठाधीश्वर व भागवत कथा प्रवक्ता आचार्य राजेंद्र दास ने कहीं।

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वृंदावन में लगने वाले कुंभ को संत समागम बताने वाले सरकारी बयान पर उन्होंने कहा कि वास्तव में कुंभ आयोजन का वास्तविक अर्थ संत समागम ही होता है। इसलिए कुंभ के स्थान पर संत समागम के नाम से इस आयोजन का नया नामकरण नहीं होना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि जहां भी कुंभ कलश से अमृत की बूंदें गिरी थीं, वहां सभी जगह कुंभ का आयोजन होता है। इसी क्रम में पुराणों में यह वर्णित है कि गरुड़ भगवान ने कुंभ कलश के साथ यमुना किनारे पर कदंब वृक्ष पर विश्राम किया था। उस दौरान अमृत की कुछ बूंदें यहां भी छलकी थीं। इसी मान्यता को धारण कर वैष्णव, रसिक संत एवं हरिभक्त सदा सर्वदा से कुंभ का आयोजन करते आ रहे हैं। 

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कुँभ के लिए भूमि सुरक्षित करने की मांग
उन्होंने दोहराया कि आज प्रदेश में एक संत की ही सरकार है, लिहाजा इस कुंभ को विधिवत कुंभ के रूप में ही घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने 50 एकड़ भूमि को कुंभ के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित करने की मांग को संशोधित कर भविष्य का ध्यान रखते हुए कम से कम 100 एकड़ भूमि को कुंभ के लिए संरक्षित किए जाने की मांग भी की। 

संन्यासी अखाड़ों द्वारा इस बार से वृंदावन कुंभ में अपनी सहभागिता किए जाने की घोषणा पर उन्होंने कहा कि नई परंपरा प्रारंभ किए जाने की कोई वजह जान नहीं पड़ती। वैसे तो सभी आएं, दर्शन करें, स्नान करें, लेकिन नई परंपरा के तहत यदि वृंदावन में संन्यासी अखाड़े अपने कैंप लगाते हैं, तो उतना स्थान भी वृंदावन में नहीं है। 
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