कुँभ के लिए भूमि सुरक्षित करने की मांग
उन्होंने दोहराया कि आज प्रदेश में एक संत की ही सरकार है, लिहाजा इस कुंभ को विधिवत कुंभ के रूप में ही घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने 50 एकड़ भूमि को कुंभ के लिए सुरक्षित एवं संरक्षित करने की मांग को संशोधित कर भविष्य का ध्यान रखते हुए कम से कम 100 एकड़ भूमि को कुंभ के लिए संरक्षित किए जाने की मांग भी की।
संन्यासी अखाड़ों द्वारा इस बार से वृंदावन कुंभ में अपनी सहभागिता किए जाने की घोषणा पर उन्होंने कहा कि नई परंपरा प्रारंभ किए जाने की कोई वजह जान नहीं पड़ती। वैसे तो सभी आएं, दर्शन करें, स्नान करें, लेकिन नई परंपरा के तहत यदि वृंदावन में संन्यासी अखाड़े अपने कैंप लगाते हैं, तो उतना स्थान भी वृंदावन में नहीं है।