जलेसर विधानसभा क्षेत्र के महापुर गांव के मतदाताओं ने भी यही मन बना रखा है। हालांकि यहां मुद्दे अलग हैं। ग्रामीणों के अनुसार वह दो दशक से गंदगी, पेयजल संकट तथा जर्जर प्राथमिक विद्यालय भवन की समस्या से जूझ रहे हैं। जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते लोगों ने सामूहिक रूप से मतदान बहिष्कार का निर्णय लिया है।
21 जनवरी को लोगों ने जुलूस निकालकर विरोध प्रदर्शित किया था। एटा सदर विधानसभा सीट में सकीट ब्लॉक क्षेत्र के गांव कुल्ला हबीबपुर के लोगों ने भी 21 जनवरी को विरोध प्रदर्शन कर मतदान का बहिष्कार करने का निर्णय लिया था। यहां गांव के मुख्य मार्ग के जर्जर होने की समस्या है। हालांकि लोगों ने समझदारी दिखाते हुए अपना निर्णय बदल अब मतदान के लिए राजी हो गए हैं।
ग्रामीणों ने ये कहा
महापुर के केशपाल सिंह ने कहा कि गांव में पेयजल की समस्या है। गांववासियों ने चंदा कर तीन किमी दूर स्थित गांव कर्थिनी में नलकूप लगाया है, जहां से पानी भरकर लाते हैं। राजकुमार सिंह ने कहा कि गांव स्थित प्राथमिक विद्यालय काफी समय से जर्जर बना हुआ है। जो कभी भी दुर्घटनाग्रस्त हो सकता है। बच्चों को भेजने में डर लगता है।
महापुर के ही प्रेमपाल सिंह ने कहा कि गांव में बरात घर, खड़ंजा, पेयजल और जलभराव, विकास कार्य, साफ-सफाई आदि को समस्याओं लेकर ग्रामीणों में काफी आक्रोश है। इनका निदान होना चाहिए। सूरजपाल शर्मा ने कहा कि ग्राम पंचायत और गांव खुले में शौच मुक्त घोषित किए जा चुके हैं, लेकिन पूरे गांव में 10-12 शौचालय ही बनवाए गए हैं।
अलीगंज के राजेश गुप्ता ने कहा कि कॉलोनी में बिजली नहीं, पानी नहीं आखिर हम लोग कैसे जीवन काटें? बहिष्कार की घोषणा के बावजूद अब तक कोई नेता या अफसर नहीं आया। कन्हैया लाल ने कहा कि बिजली कई साल से बंद है। कुछ लोगों ने अपने सोलर पैनल ले लिए हैं, तो रोशनी हो जाती है। जबकि अन्य घरों में रात में अंधेरा रहता है।
चुनाव बाद करेंगे प्रदर्शन
कुल्ला हबीबपुर के सुघड़ सिंह ने कहा कि गांव की सबसे बड़ी समस्या जर्जर मुख्य मार्ग है। इसके लिए कई बार अर्जियां दीं। सुनवाई न होने पर मतदान बहिष्कार का निर्णय लिया था। विक्रम सिंह ने कहा कि मतदान न करने का मन था, लेकिन मताधिकार का महत्व समझते हुए इस निर्णय को बदल दिया है। चुनाव बाद विरोध प्रदर्शन करेंगे।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में मताधिकार काफी कीमती है। लोगों को समझदारी और जागरूकता दिखाते हुए इसे नहीं गंवाना चाहिए। किसी को समस्या है तो विरोध जताने के और भी तरीके हैं। उनकी समस्या जानने के लिए अधिकारी पहुंचेंगे। जायजा कर समस्याओं का निस्तारण करने के लिए कार्रवाई भी की जाएगी और उन्हें मतदान करने के लिए समझाया जाएगा।