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Etah: बच्चों के लिए जानलेवा हो रहा है बुखार, पीडियाट्रिक वार्ड हुआ फुल

Sun, 11 Sep 2022 02:58 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एबी सिंह का कहना है कि वर्तमान में मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से वायरल बुखार चल रहा है। बच्चों को बुखार से बचाने के लिए वर्तमान में पानी गर्म करने के बाद ठंडा करके पिलाएं। नियमित टीकाकरण कराएं।
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जिला अस्पताल में भर्ती बुखार से पीड़ित मरीज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एटा में मौसम के बदलाव के साथ बुखार कहर ढा रहा है। बच्चे बुखार से बीमार पड़ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में हर दिन बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। छह सितंबर को बुखार से पीड़ित 180 बच्चे ओपीडी में आए थे। शनिवार को यह आंकड़ा 250 पर पहुंच गया है। दस बेड की क्षमता वाला पीडियाट्रिक वार्ड फुल हो गया है। ऐसे में स्वास्थ्य कर्मियों और चिकित्सकों को बुखार से पीड़ित बच्चों को दूसरे वार्ड में भर्ती करना पड़ रहा है। 
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मौसम में हो रहा उतार-चढ़ाव बच्चों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। वह वायरल बुखार के पीड़ित हो रहे हैं और मेडिकल कॉलेज स्थित पीडियाट्रिक वार्ड में बीमार बच्चों को भर्ती करके उपचार कराया जा रहा है। तीमारदारों व अभिभावकों की भी मुश्किलें बढ़ी हुई हैं। बुखार को लेकर चिंताएं परिजन के माथे पर देखी जा रही हैं और वह निजी क्लीनिक और मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकों से उपचार करा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी की बात की जाए तो हर दिन बीमार बच्चे आ रहे हैं। इनमें अधिकांश बुखार पीड़ित होते हैं। गंभीर बच्चों को बालरोग विशेषज्ञ पीडियाट्रिक वार्ड में भर्ती करके उपचार कराने की सलाह दे रहे हैं और प्रत्येक दिन 10 के करीब बच्चे भर्ती भी किए जा रहे हैं। 

यह है आंकड़ा 

दिन         बीमार बच्चों की संख्या 
6 सितंबर   180 
7 सितंबर    195 
8 सितंबर     230
9 सितंबर     235 
10 सितंबर   250 
 

बच्चों को गर्म पानी ठंडा करके पिलाएं

नोडल पीडियाट्रिक वार्ड एवं वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एबी सिंह का कहना है कि वर्तमान में मौसम में हो रहे उतार-चढ़ाव की वजह से वायरल बुखार चल रहा है। बच्चों को बुखार से बचाने के लिए वर्तमान में पानी गर्म करने के बाद ठंडा करके पिलाएं। नियमित टीकाकरण कराएं। ओस से बचाव रखें। मच्छरदानी का उपयोग करें। फुल आस्तीन के हल्के पतले सूती कपड़े पहनाएं। ओडोमास क्रीम का उपयोग करें। घर के आसपास पानी नहीं भरने दें।  छतों पर टायर, मटका या कूलर को साफ करके रखें। ताकि डेंगू जैसी गंभीर बीमारी से बच्चों को बचाया जा सके। अगर बुखार आ जाए तो ठंडे पानी के कपड़े से शरीर को पौंछते रहें। हर दिन करीब 10 बच्चे भर्ती किए जाते हैं। 
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