आगरा में वायरल फीवर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एसएन मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में 35 फीसदी तक मरीज बढे़ हैं। पिछले सात दिन में 190 नए मरीज भर्ती हुए हैं। मेडिसिन विभाग का वार्ड फुल हो गया है। 50 बेड का अतिरिक्त वार्ड बनवाया गया है। चिकित्सकों का कहना है कि मौसम के बदलाव से वायरल फीवर फैल रहा है। ऐसे में अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखें।
सरकारी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में पिछले सप्ताह तक ओपीडी में 500-550 मरीज आ रहे थे। अब यह संख्या 650 से 700 तक पहुंच गई है। इनमें 35 फीसदी मरीज वायरल फीवर, जुकाम-खांसी के हैं। डॉक्टरी पूछताछ में मरीज दो-तीन दिन बुखार ठीक न होने के बाद आ रहे हैं।
ओपीडी में डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया की आशंका पर 40-50 मरीजों के रक्त के नमूने लैब भेजे जा रहे हैं। इस सीजन में डेंगू के दो, मलेरिया के 32 मरीज मिले हैं। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. पीके माहेश्वरी ने बताया कि चार-पांच दिनों से वायरल फीवर के मरीज 35 फीसदी तक बढ़ गए हैं। वार्ड फुल होने पर अतिरिक्त वार्ड तैयार किया है।
वातावरण में हैं 300 तरह के वायरस
जिला मलेरिया अधिकारी आरके दीक्षित बताते हैं कि इस मौसम में 300 तरह के वायरस वातावरण में सक्रिय हैं। प्रतिरोधक क्षमता कम वाले लोगोें को पर यह प्रभावी जल्दी होते हैं और वायरल फीवर समेत अन्य बीमारियां हो रही हैं। 20-25 दिन और संक्रामक बीमारियों का खतरा रहेगा। इसके बाद सामान्य स्थिति हो जाएगी।
एसएन मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. टीपी सिंह बताते हैं कि वायरल फीवर का हर बार अलग वायरस होता है, जिसकी पहचान नहीं हो पाती है। इस बार के वायरस के प्रभाव से पहले एक-दो दिन में तेज बुखार और गला जकड़ रहा है। अधिकांश का बुखार सात दिन से पहले नहीं उतर रहा है। शरीर-सिर में दर्द की शिकायत ज्यादा है। कमजोरी महसूस होती है।
प्राइवेट अस्पतालों में 50-80 हजार रुपये का खर्च
सरकारी अस्पतालों में इलाज निशुल्क है लेकिन प्राइवेट में वायरल फीवर घर का बजट बिगाड़ रहे हैं। निजी अस्पताल में बुखार के मरीज भर्ती होने पर खर्चा 50 से 80 हजार रुपये बैठ रहा है। इसमें डेंगू, मलेरिया-चिकनगुनिया की जांच, प्लेटलेट्स कम होने पर जंबो पैक, बेड चार्ज, चिकित्सकों की फीस, दवाएं समेत अन्य खर्च हैं। सात से दस दिन बाद ही मरीज डिस्चार्ज किए जा रहे हैं।
ये बरतें सावधानी
- खट्टी और ठंडी सामग्री खाने से बचें।
- गुनगुना पानी पिएं, फ्रिज का पानी बंद कर दें।
- खांसी-जुकाम के मरीजों के सीधे संपर्क से बचें।
- भोजन से पहले हाथों को साबुन से साफ रखें।
- ठेल-ढकेल और बाहर के भोजन से बचें।