शहर में निजी अस्पताल में तैनात बाल रोग विशेषज्ञों के यहां पहले 500 से अधिक ओपीडी थी और अब यह ओपीडी 600 तक पहुंच गई है। निजी अस्पतालों में बेड फुल हैं। एक बेड पर दो मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। नए इलाकों से आ रहे मरीज स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का कारण बना हुए हैं।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संगीता अनेजा ने कहा कि मरीजों की संख्या में कुछ कमी आई है। नए मरीजों में गंभीर लक्षण नहीं हैं। वर्तमान में सौ शैय्या अस्पताल में 242 बच्चे भर्ती हैं। मरीजों का उचित इलाज किया जा रहा है।
गांवों में नहीं थमा प्रकोप
जिले के ग्रामीण इलाकों में डेंगू, मलेरिया एवं वायरल फीवर की रफ्तार अभी थमी नहीं है। स्वास्थ्य विभाग भले ही उपचार का दावा कर रहा हो, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार कैंप में मिलने वाली गोलियों से आराम नहीं मिल रहा है। इससे मरीज निजी अस्पताल में उपचार कराने के लिए मजबूर हैं।
खैरगढ़ क्षेत्र के कनवारा गांव में घर-घर चारपाइयां बिछी हैं। इस गांव में महेंद्र कुमार की 18 वर्षीय बेटी शबनम की बीस सितंबर को मौत हो गई थी। इससे पहले ज्वाला प्रसाद की बेटी (22) पिंकी की मौत हो चुकी है। गांव में भगवानदास के घर में आकाश (21), अमित (18),अंशु (14), अमन (16) बीमार हैं।
सुरेश के घर में प्रशांत सहित तीन लोग बीमार हैं। दिलीप कुमार की तबीयत खराब है तो उनकी पत्नी रेखा देवी एवं रामगोपाल, पंकज कुमार, ईशू पुत्र चंद्रपाल बीमार है। पड़ोस के गांव ललउआ में मंजू (32) पत्नी सत्यप्रकाश की एफएच मेडिकल कालेज में 21 सितंबर को मौत हो गई थी।