बाह। यमुना, चंबल और उटंगन नदी के बीहड़ में ककोरा की फसल लहलहाने लगी है। बारिश में उगने वाली बेल पर लगे ककोरा के मंडी में 200 रुपये प्रति किलो भाव मिलने से बाह तहसील के 85 गांवों के किसान खुश हैं।
बाह से लेकर बमरौली कटारा तक सड़क किनारे बिक्री के लिए रखे गए ककोरा के ढेर देखे जा रहे हैं। बाह, भिंड, मुरैना, इटावा, धौलपुर के चंबल के बीहड़, बाह, फिरोजाबाद, इटावा के यमुना के बीहड़, राजाखेड़ा, पिनाहट के उटंगन के बीहड़ में बारिश के साथ ही बिना बोए ककोरा के फूटे अंकुर बेल बन गए। रेहा के प्रधान अजय कौशिक, सिमराई के प्रधान जयवीर सिंह, भगवानपुरा के प्रधान बच्छराज ने बताया आजकल बेल पर ककोरा की फसल लहलहा रही है। ग्रामीण जरार, बाह, जैतपुर, भदरौली, पिनाहट की मंडी में 200 रुपये किलो के भाव बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। पैदावार बढ़ने के साथ ही काकोरा दिल्ली, जयपुर, कानपुर, ग्वालियर तक की मंडियों में भेजा जा रहा है।
सेहत और समृद्धि का खजाना
- बीहड़ के सूखे इलाकों में ककोरा की खेती किसानों के लिए वरदान से कम नहीं है। ककोरा को सब्जी, अचार और आयुर्वेदिक दवाएं बनाने में प्रयोग किया जाता है। आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. रामौतार पचौरी ने बताया कि रोजाना इसका सेवन करके डायबिटीज तथा ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं नियंत्रण में रहती हैं। इसके सेवन से आंखों की कम होती रोशनी, सिर का दर्द, बालों के झड़ने, पेट के इंफेक्शन, खांसी, कानों के दर्द और पीलिया जैसी बीमारियों से राहत मिलती है। भाजपा कोर कमेटी के सदस्य पवन भदौरिया ने बताया बारिश के मौसम में बीहड़ में पैदा हुई ककोरा की फसल ग्रामीण किसानों के लिए सेहत के साथ समृद्धि का प्रतीक है।
बाह: बीहड़ में लहलहाई ककोरा की फसल, मंडी में भी पहुंची