फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विजय दिवस: पाक के मिशन चंगेज खान को ताजनगरी से मिला था करारा जवाब, युद्ध विराम न होता तो लाहौर पर होता भारतीय झंडा

Thu, 16 Dec 2021 11:53 AM IST
Abhishek Saxena संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

वायु सेना के युद्ध इतिहास में दर्ज है कि तीन दिसंबर की शाम को आगरा एयरबेस पर पाक वायु सेना के विमानों ने 226 किलो के 16 बम यहां गिराए थे। इनमें तीन बम एयरफोर्स परिसर में गिरे, जबकि बाकी बम एयरबेस के समीप स्थित खेतों में गिरे। 
विज्ञापन
रुदमुली में शहीद स्मारक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

वर्ष 1971 युद्ध के दौरान रुदमुली गांव के 88 रणबांकुरों ने पाकिस्तान के ढाका, अकोरा, हिल्ली, नागेश्वरी पोस्ट पर कब्जा कर तिरंगा फहरा दिया था। विजय के नायक रहे रुदमुली के सर्वजीत सिंह, कैप्टन निहाल सिंह, कोरथ के कैप्टन रामशंकर सिंह बताते हैं कि युद्ध विराम न होता तो लाहौर पर भी भारतीय झंडा होता। 51 साल पहले उस युद्ध में बाह के 350 जवानों ने अपना शौर्य दिखाया था। इनमें से 88 रणबांकुरे अकेले रुदमुली गांव के ही थे। पूर्वी सेक्टर में रुदमुली के सर्वजीत सिंह, विष्णु बहादुर, कर्नल रामाधार सिंह, कैप्टन निहाल सिंह, दिनेश प्रताप सिंह, नरेश सिंह, रघुराज सिंह, ओमकार सिंह, विजय सिंह, रतिभान सिंह, नरेश सिंह आदि और पश्चिमी सेक्टर में अतर सिंह, श्रीराम, महेंद्र पाल सिंह, नरेंद्र सिंह, श्रीचंद्र, दुर्गविजय सिंह, भूपेंद्र सिंह, नजले, मुलचंद्र बरुआ, पातीराम, जगतपाल सिंह आदि ने पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे किए थे। रुदमुली गांव के जसकरन सिंह, फतेहपुरा गांव के सूबेदार राज बहादुर सिंह, पुरा चौधरी गांव के ऊधम सिंह शहीद हुए थे। 

विज्ञापन

हवाई अड्डों पर किया था हमला
तीन दिसंबर 1971 की वो सर्द रात बेहद डरावनी थी। सन्नाटे को चीरते जंगी जहाज और दूर से आती बमबारी की आवाजों से लोग भयभीत थे। पाकिस्तान ने अपने मिशन चंगेज खान के तहत देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर हमला किया था। इनमें खेरिया एयरबेस भी शामिल था। कई बम गिराए गए थे लेकिन आगरा के रणबांकुरों ने उन्हें करारा जवाब दिया। सिर्फ एक रात में हवाई पट्टी फिर से बना दी और यहां से उड़े फाइटर जहाजों से पाकिस्तान को घुटने टेकने को मजबूर कर दिया था। 
 

विज्ञापन

13 दिनों तक चले युद्ध के पहले दिन तीन दिसंबर की शाम खेरिया एयरपोर्ट पर पाकिस्तानी विमान ने बम गिराए थे। एयर स्ट्रिप के ऊपर और आसपास गहरे गड्ढे हो गए थे। मिशन चंगेज खान के तहत पाकिस्तान ने देश के 11 प्रमुख एयरबेस आगरा, अमृतसर, अंबाला, अवंतीपुर, बीकानेर, हलवाड़ा, जोधपुर, जैसलेमर, पठानकोठ, भुज व श्रीनगर पर शाम 5:30 बजे हवाई बमबारी की थी। 
काले कपड़े और घास से ढंका था ताज 
ताजमहल को पाक के हवाई हमले से बचाने के लिए मुख्य गुंबद और चारों मीनारों को काले रंग के कपड़े से ढक दिया गया था। मुख्य गुंबद के ऊपर एक पाड़ बांधी गई थी और कपड़े को नीचे तक लटका दिया गया था। ताज के फर्श को पेड़ों की पत्तियों और घास से ढंका गया था। 
सन्नाटे के बीच आते थीं जहाजों की आवाजें  
युद्ध के दौरान पुलिस गलियों में घूमती रहती थी। किसी को लाइट जलाने की इजाजत नहीं थे। सन्नाटे के बीच जहाजों की आवाज सुनाई देते थे। हम कुछ लोग खेरिया एयरपोर्ट के उस स्थान पर गए थे, जहां पाकिस्तान वायु सेना ने बम गिराए थे। वहां एक बड़ा सा गड्ढा हो गया था। आसपास के कुछ खेतों में आग भी लग गई थी। - राज किशोर राजे, इतिहासविद्,  विजय दिवस पर विशेष 
अठखेलियां: गिरिराज जी की तलहटी में साइबेरियन पक्षियों का बसेरा, अगर आप पक्षी प्रेमी हैं तो पूछरी और राधाकुंड जरूर आइए

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें